दिल्ली कैबिनट ने बुधवार को सरकारी स्कूलों के दसवीं और बारहवीं के लगभग 3.14 लाख छात्रों की सीबीएसई परीक्षा फीस 2019-20 से देने के सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. जिसके बाद दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 10वी और 12वी में पढ़ने वाले हर वर्ग के 3.14 लाख बच्चों की CBSE परीक्षा की महंगी फीस अब सरकार देगी. इसमें सरकार के 57 करोड़ रुपये खर्च होंगे.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में कैबिनेट ने शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी कि दिल्ली सरकार दसवीं और बारहवीं कक्षा के छात्रों, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की सीबीएसई परीक्षा फीस का भुगतान करेगी. वहीं इसमें पत्राचार विद्यालय के छात्र भी शामिल है.
इस बात की जानकारी अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट के जरिए दी.
कैबिनेट के फैसले से सरकार को लगभग 57 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 3 लाख 14 हजार छात्रों को फायदा होगा. सरकार ने घोषणा की थी कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने घोषणी की थी, फीस बढ़ा दी थी. जिसमें कक्षा 10 और 12 के लिए जनरल कैटेगरी के छात्रों की फीस 5 विषयों के लिए दोगुनी कर 750 रुपये से 1,500 रुपये कर दी गई.
अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्र जो पहले 375 रुपये का भुगतान कर रहे थे, अब पांच विषयों के लिए 1,200 रुपये फीस कर दी गई थी.
राष्ट्रीय राजधानी के लिए एक विशेष व्यवस्था में, छात्र केवल 50 रुपये का भुगतान कर रहे थे, बाकी के 300 रुपये दिल्ली सरकार चुकाती थी. भुगतान सीधे सीबीएसई को किया जाएगा और छात्रों को कोई बोझ नहीं उठाना होगा. आपको बता दें, सीबीएसई फीस में बढ़ोतरी होने के बाद
दिल्ली के डिप्टी सीएम और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर दी. उन्होंने कहा था कि स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वह किसी भी छात्र से बोर्ड की फीस न लें.
उन्होंने 23 अगस्त को ट्वीट करके जानकारी दी थी कि दिल्ली के सरकारी स्कूल 10वीं और 12वीं के सभी छात्रों की सीबीएससी परीक्षा की फीस सरकार देगी.
वापस लेना पड़ा बढ़ाई गई फीस फैसला
फीस बढ़ने के साथ छात्रों और अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई थी. जिसके चलते केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने आखिरकार दिल्ली में एससी/एसटी छात्रों को राहत देते हुए 10वीं-12वीं परीक्षा शुल्क में की गई बढ़ोतरी को वापस ले लिया है.
सीबीएसई ने एक बयान जारी कर कहा कि एससी/एसटी छात्रों से परीक्षा शुल्क के रूप में पहले की तरह अब भी मात्र 50 रुपया ही लिया जाएगा. बाकी का पैसा दिल्ली सरकार चुकाएगी.
aajtak.in