ऐसी उम्र में जब अधिकांश बच्चे दसवीं बोर्ड की परीक्षाओं की तैयारी में लगे होते हैं. कोर्स की किताबों और साइड-बुक्स में उलझे होते हैं. ठीक उसी उम्र में एक ऐसा लड़का भी है जो हमारी दुनिया को रहने के लिए बेहतर बनाने में लगा है. ऐसा करने के क्रम में वह संसाधनों के अभाव से भी जूझ रहा है, पढ़ें उसके संघर्ष और सफलता की कहानी...
बिना किसी खास शिक्षा व प्लेटफॉर्म के किया संघर्ष...
इस 14 वर्षीय लड़के का नाम नमन तिवारी है और यह लड़का है. इसके लिए उसने कोई ट्रेनिंग भी नहीं ली है. शौक से शुरू हुआ उसका सफर आज पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया है. उसके नाम आज कुल 22 एप बनाने का क्रेडिट है. वे बताते हैं कि शाहजहांपुर जैसे छोटे शहर में लोग एंड्रायड डेवलपमेंट जैसे शब्दों से वाकिफ तक नहीं हैं. यहां कोई मार्गदर्शन भी नहीं होता. वो सब-कुछ खुद से करते-करते ही सीखे हैं. उनके पास तो मोबाइल फोन तक नहीं था. उन्होंने सब-कुछ इंटरनेट और लैपटॉप की मदद से किया है.
11 साल से ही कर दी थी शुरुआत...
नमन तब शाहजहांपुर के तक्षशिला पब्लिक स्कूल में 7वीं क्लास में पढ़ने वाले छात्र थे और उनकी उम्र महज 11 साल थी. उन्होंने इसे शौकिया तौर पर शुरू किया था. उन्होंने पहले पहल कई बनाए मगर समाज की समस्याओं को देखते-देखते वे मेडिकल एप की ओर रुख कर गए. वे अब मलेरिया से लड़ने व उसकी पहचान करने वाले एप का निर्माण भी कर चुके हैं.
मलेरिया एप से लेकर Secure Girls तक...
वैसे तो वे कई एप बना चुके हैं और उनसे उन्हें भी मिली है लेकिन मलेरिया एप व Secure Girls बनाने के बाद वे खुद को ज्यादा संतुष्ट व जिम्मेदार महसूस करते हैं. ऐसे एप उन तमाम लोगों के लिए लाभदायक हो सकते हैं जिनके पास मलेरिया जैसे रोगों के इलाज के पैसे नहीं हैं. वे इस एप के माध्यम से एक्सपर्ट सलाह भी मुहैया कराते हैं.
इसके अलावा किसी भी तरह के असुरक्षा से लड़ने के लिए Secure Girls एप है. इस एप के पैनिक बटन के इस्तेमाल से किसी को भी भेजा जा सकता है. उनके सारे एप Google PlayStore पर मौजूद हैं. वे अभी शौकिया तौर पर इस काम में लगे हैं और भविष्य में खुद की सॉफ्टवेयर कंपनी खोलने का मंसूबा रखते हैं.
विष्णु नारायण