कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों, तो बड़ी से बड़ी शारीरिक या मानसिक बाधा भी आपका रास्ता नहीं रोक सकती. नोएडा की रहने वाली वेदिका ने इस बात को सच कर दिखाया है. सीबीएसई (CBSE) के 10वीं बोर्ड के नतीजों में वेदिका ने 500 में से 482 मार्क्स स्कोर करके उन सभी लोगों के मुंह बंद कर दिए हैं, जो चुनौतियों के आगे घुटने टेक देते हैं.
क्या है डिस्ग्राफिया? जिससे जूझ रही हैं वेदिका
वेदिका 'डिस्ग्राफिया' (Dysgraphia) नाम की एक लर्निंग डिसेबिलिटी से जूझ रही हैं. इस समस्या में इंसान को लिखने और स्पेलिंग याद रखने में काफी दिक्कत होती है. वेदिका बताती हैं कि उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी लिखने में ही आती थी. उन्हें खुद से उम्मीद थी कि शायद वे 75% तक अंक ले आएंगी, लेकिन जब उन्होंने अपना स्कोरकार्ड देखा तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए. उन्होंने 96.4% अंक हासिल कर सबको चौंका दिया है.
AI जैसे मुश्किल विषय में 100 में से 99
आज के दौर के सबसे तकनीकी और कठिन माने जाने वाले सब्जेक्ट 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) में वेदिका का प्रदर्शन किसी करिश्मे से कम नहीं है. उन्हें इस विषय में 99 नंबर मिले हैं. वेदिका का कहना है कि उन्होंने हर दिन 5 से 6 घंटे की कड़ी मेहनत की और अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने स्कूल के शिक्षकों के सहयोग को दिया.
जब डॉक्टर मां भी नहीं पहचान पाईं बीमारी
वेदिका की मां मृणाल भार्गव खुद एक डॉक्टर हैं, लेकिन उन्होंने एक बड़ी ही ईमानदार बात साझा की. उन्होंने बताया कि शुरुआत में वे खुद भी अपनी बेटी की इस समस्या को समझ नहीं पाई थीं. उनका मानना है कि समाज में अक्सर ऐसे बच्चों को 'बेलो एवरेज' (औसत से कम) कहकर छोड़ दिया जाता है, जबकि उन्हें बस थोड़े से अतिरिक्त सहयोग और सही डायग्नोसिस की जरूरत होती है.
बोर्ड और स्कूल का मिला साथ
मृणाल ने बताया कि सीबीएसई बोर्ड और स्कूल द्वारा दी गई विशेष सुविधाओं की वजह से ही आज वेदिका का आत्मविश्वास बढ़ा है. आज वेदिका न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि वे अपनी कमियों को पहचान कर उन पर काम करना भी जानती हैं. वेदिका की यह कामयाबी उन हजारों बच्चों के लिए एक मिसाल है जो किसी न किसी चुनौती की वजह से खुद को कमतर आंकते हैं.
मनीष चौरसिया