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सोनिया गांधी: सबसे लंबे समय तक कांग्रेस अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड

aajtak.in
  • 09 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 11:39 AM IST
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कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का जन्मदिन है. उनका जन्म 9 दिसंबर, 1942 में हुआ था. आज उनका 72वां जन्मदिन हैं. आइए इसी मौके पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कई अहम और दिलचस्प बातें...

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सोनिया का जन्म वैनेतो, इटली के विसेन्जा से कुछ दूर स्थित एक छोटे से गांव लूसियाना में हुआ था. उनके पिता स्टेफिनो मायनो एक भूतपूर्व फासिस्ट सिपाही थे. उनका बचपन टूरिन, इटली से कुछ दूर स्थित ओर्बसानो में गुजरा.

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1964 में वो कैंब्रिज विश्वविद्यालय में बेल शैक्षणिक निधि के भाषा विद्यालय में अंग्रेजी भाषा का अध्ययन करने गईं, जहां उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई जो उस समय ट्रिनिटी विद्यालय कैंब्रिज में पढ़ते थे.

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बताया जाता है कि सोनिया गांधी को देखते ही राजीव गांधी उन्हें पसंद करने लगे थे. राजीव ने सोनिया को पहली बार एक रेस्टोरेंट में देखा था और उन्हें देखते ही नैपकिन के एक टुकड़े पर उनके लिए कविता लिख दी थी और मैनेजर को नैपकिन सोनिया गांधी को देने के लिए कहा.


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1968 में दोनों का विवाह हुआ, जिसके बाद वे भारत में रहने लगीं. राजीव गांधी के साथ विवाह होने के काफी समय बाद उन्होंने 1983 में भारतीय नागरिकता स्वीकार की.

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राजीव गांधी की हत्या होने के बाद कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेताओं ने सोनिया से पूछे बिना उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये जाने की घोषणा कर दी, लेकिन सोनिया ने इसे स्वीकार नहीं किया.

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राजनीति में सोनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन उन्होंने कई सालों तक जनता में कांग्रेस के प्रति विश्वास जीवित रखा. सोनिया गांधी अक्टूबर 1999 में बेल्लारी, कर्नाटक से और साथ ही अपने दिवंगत पति के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी, उत्तर प्रदेश से लोकसभा के लिए चुनाव लड़ीं.  

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राजनीति में कदम रखने के बाद उनके विदेशी मूल का मुद्दा उठाया गया. यहां तक की उनकी कमजोर हिंदी को भी मुद्दा बनाया गया. उन पर परिवारवाद का भी आरोप लगा लेकिन कांग्रेसियों ने उनका साथ नहीं छोड़ा और इन मुद्दों को नकारते रहे.

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2004 के चुनाव से पहले कांग्रेस की हालत बहुत खराब थी और माना जा रहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री होंगे. हालांकि सोनिया के नेतृत्व में लड़े गए इस चुनाव में यूपीए को अनपेक्षित 200 से ज्यादा सीटें मिली और यूपीए की सरकार बनी. उस वक्त सोनिया गांधी 16 पार्टियों के गठबंधन की नेता चुनी गईं.

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उस वक्त सोनिया गांधी ने स्वेच्छा से प्रधानमंत्री नहीं बनने की घोषणा की और सभी नेताओं ने मनमोहन सिंह का समर्थन किया और उन्हें गठबंधन का अध्यक्ष चुना गया. साल 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने फिर यूपीए के लिए देश की जनता से वोट मांगा. एक बार फिर यूपीए ने जीत हासिल की थी.

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1999 में 13वीं लोक सभा में वे विपक्ष की नेता चुनी गईं. 1998 से साल 2017 तक वह कांग्रेस अध्यक्ष रहीं. जिसके बाद उनके पुत्र राहुल गांधी को  कांग्रेस पार्टी की कमान मिली. वो जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से भी ज्यादा वक्त कांग्रेस की अध्यक्ष रही हैं. अभी तक वह कांग्रेस के इतिहास में सबसे लंबे समय तक रहने वाली अध्यक्ष हैं. सोनिया गांधी को कई बार दुनिया की पावरफुल महिलाओं की सूची में शामिल किया गया है.

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बता दें, 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस ने उन्हें पार्टी का पद संभालने का आग्रह किया गया था, लेकिन उन्होंने इसे लेने से इंकार कर दिया और कहा कि वे राजनीति से दूर रहना चाहती हैं.

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हालांकि सोनिया गांधी ने 1997 में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की और 1998 में वो कांग्रेस की अध्यक्षा चुनी गयीं. तब से  साल 2017 तक वह कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष थीं. 2004 के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद सोनिया गांधी 16 दलीय यूपीए गठबंधन की नेता चुनी गईं.


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बता दें, साल 2010 में वे फिर से चौथी बार कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गई. कांग्रेस पार्टी के 125 साल के इतिहास में सबसे ज्यादा समय तक अध्यक्ष रहने का भी रिकार्ड अभी तक उन्हीं के नाम हैं.

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बता दें, 20 साल पहले अप्रैल 1998 में जब सोनिया गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली, तब भी पार्टी की सियासी हालत कमजोर थी. 21 मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या होने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया से पूछे बिना उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा कर दी, परंतु सोनिया ने इसे स्वीकार नहीं किया और कभी भी राजनीति में नहीं आने की कसम खाई थी.

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सोनिया ने राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना के साथ खुद को राजनीति से दूर रखने की कोशिश की थी.

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इसके बाद 1996 में नरसिम्हा राव की सरकार जाने के बाद पार्टी की चिंता और बढ़ गई. इस चुनाव में बीजेपी और जनता दल ने भारी बढ़त हासिल की और बीजेपी ने गठबंधन सरकार बनाई.

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कांग्रेस की हालत दिन-ब-दिन बुरी होती देख सोनिया गांधी ने कांग्रेस नेताओं के दबाव में 1997 में कोलकाता के प्लेनरी सेशन में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की, जिसके बाद अप्रैल 1998 में वो कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं. इस तरह नेहरू-गांधी परिवार की पांचवीं पीढ़ी के रूप में सोनिया गांधी ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी.

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