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ऐसे बनें भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अंपायर, BCCI देता है लाखों में सैलरी

aajtak.in/प्रियंका शर्मा
  • 06 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 5:47 PM IST
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किसी भी खेल में जितना महत्वपूर्ण एक खिलाड़ी होता है उतना ही महत्वपूर्ण एक अंपायर की भूमिका होती है. वहीं क्रिकेट के खेल में अंपायरों की भूमिका न्यायपालिका में जजों की तरह होती है. आइए जानते हैं भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) में अंपायर बनने की क्या प्रक्रिया होती है.

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जो भी उम्मीदवार अंपायर बनना चाहता है उसके जरूरी नहीं है कि वह प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खिलाड़ी हो. अगर किसी ने पहले क्रिकेट खेला हो तो यह एक अतिरिक्त योग्यता मानी जाएगी.


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ये होनी चाहिए योग्यताएं


- उत्तम नेत्र ज्योति


- अच्छी फिटनेस


- क्रिकेट के नियमों की पूरी जानकारी





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बता दें, भारतीय क्रिकेट बोर्ड में अंपायर बनने के लिए अंपायरों के लगातार प्रदर्शन को देखा जाता है. जिसके बाद जो अंपायर बहुत कम गलतियां करते हैं उन्हें विभिन्न ग्रेड में बांटा जाता है.

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BCCI ने अंपायरों को 4 ग्रेड में बांटा जाता है जो इस प्रकार है:-

ग्रेड A: इस लिस्ट में अभी 20 अंपायर हैं

ग्रेड B: इस लिस्ट में अभी 25 अंपायर हैं

ग्रेड C: इस लिस्ट में अभी 35 अंपायर हैं

ग्रेड D: इस लिस्ट में अभी 40 अंपायर हैं



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यहां जानें- क्या है अंपायर बनने की प्रक्रिया. जानें- स्टेप बाई स्टेप


- सबसे पहला काम संबंधित राज्य के क्रिकेट संघ के साथ रजिस्ट्रेशन करना है. जिसके बाद आपका नाम राज्य संघ के द्वारा ही बोर्ड ऑफ कंट्रोल फ़ोर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI) को भेजी जाती है.

- एक बार जब आप स्थानीय मैचों में भाग लेंगे, तो राज्य संघ ( स्टेट एसोसिएशन) आपके नाम को BCCI द्वारा हर साल या हर दो साल में एक बार आयोजित की जाती है. फिर चौथे दिन लिखित परीक्षा का आयोजन किया जाता है. जिसके बाद मेरिट लिस्ट के आधार पर उम्मीदवारों को शॉर्ट लिस्ट किया जाता है.

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- फिर जिन उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है  उन्हें एक इंडक्शन कोर्स में आने का मौका दिया जाता है जिसमें खेल के नियमों पर और उससे संबंधित डाउट्स क्लियर करने का मौका मिलता है.

-  आपको बता दें, शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के लिए एक और परीक्षा आयोजित की जाती है, जो या तो प्रैक्टिकल होगी या फिर मौखिक.


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- जो उम्मीदवार ये परीक्षा पास कर लेते हैं उन्हें लेवल 2 परीक्षा में भाग लेना होता है. जो आमतौर पर एक साल के भीतर आयोजित की जाती है.


- लेवल 2 परीक्षा में लिखित, प्रैक्टिकल और वायवा होता है. जो उम्मीदवार ये परीक्षा पास कर लेते हैं वह मेडिकल टेस्ट के योग्य होते हैं.


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- जो उम्मीदवार लेवल 1 और लेवल 2 की परीक्षा पूरी तरह से पास कर लेते हैं उन्हें BCCI का अंपायर घोषित कर दिया जाता है.

इसके बाद अंपायरिंग की शुरुआत भारत में आयोजित होने वाले रणजी ट्राफी, देवधर ट्राफी आदि के मैचों से होती है. वहीं एक्सपीरियंस के बाद ही आप  इंटरनेशनल मैचों में अंपायरिंग कर सकते हैं.




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BCCI ने बढ़ाई भारतीय अंपायरों की सैलरी

रिपोर्ट्स की माने से साल 2018 में BCCI ने भारतीय अंपायर की सैलरी को दुगुना करने का निर्णय लिया था. जिसमें टॉप 20 अंपायरों को 40,000 रुपए प्रति दिन के हिसाब से सैलरी देने का फैसला किया गया था. वहीं टी-20 के लिए अंपायर को एक मैच के 20,000 रुपए दिए जाने का फैसला लिया गया था.


All Image credit: Reuters

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