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जानें दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के खास फैक्ट

aajtak.in
  • 31 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 9:58 AM IST
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लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की आज 144वीं जयंती है. इसी मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल सरदार वल्लभ भाई पटेल की विशाल प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का अनावरण किया था. बता दें, इस प्रतिमा को दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति का दर्जा मिला है. आइए जानते हैं इस मूर्ति के बारे में जरूरी फैक्ट्स.

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'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' की शुरुआत 31 अक्टूबर, 2013 को हुई  थी. उस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे.

इसकी नींव रखने और उद्घाटन दोनों ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल रहे थे. मूर्ति के अंदर एक लाइब्रेरी भी है, जहां पर सरदार पटेल से जुड़े हुए इतिहास को दर्शाया गया है. स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है.

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मूर्ति में मांगकर लगाया गया लोहा

लौह पुरुष की मूर्ति के निर्माण में लाखों टन लोहा और तांबा लगा है और कुछ लोहा लोगों से मांगकर लगाया है. जी हां, इस मूर्ति को बनाने के लिए लोहा पूरे भारत के गांव में रहने वाले किसानों से खेती के काम में आने वाले पुराने और बेकार हो चुके औजारों का संग्रह करके जुटाया गया.

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इसके लिए एक ट्रस्ट भी बना "सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट". इस ट्रस्ट ने इस काम के लिए पूरे भारत में 36 ऑफिस भी खोले थे, जिससे लगभग 5 लाख किसानों से लोहा जुटाने का लक्ष्य रखा गया. इस अभियान का नाम 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी अभियान दिया गया. रिपोर्ट्स की मानें तो 3 महीने लंबे इस अभियान में लगभग 6 लाख ग्रामीणों ने मूर्ति स्थापना हेतु लोहा दान किया था. इस दौरान लगभग 5,000 मीट्रिक टन लोहे का संग्रह किया गया था.

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मूर्ति के निर्माण के लिए केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद अक्टूबर 2014 मेंलार्सन एंड टूब्रो कंपनी को ठेका दिया गया था. इस मूर्ति में 4 धातुओं का उपयोग किया गया है जिसमें सालों तक जंग नहीं लगेगा. स्टैच्यू में 85 फीसदी तांबे का इस्तेमाल किया गया है.

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इसके अलावा 5700 मीट्रिक टन स्ट्रक्चरल स्टील और 18500 मीट्रिक टन रिइनफोर्समेंट बार्स भी इस्तेमाल किए गए हैं. यह मूर्ति 22500 मीट्रिक टन सीमेंट से बनी है. इस विशाल प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर है. इस मूर्ति को बनाने में करीब 44 महीनों का वक्त लगा था.

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क्यों 182 मीटर की ही है सरदार पटेल की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी


'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' मू्र्ति की ऊंचाई 182 मीटर है और यह दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है. यह 182 मीटर का आंकड़ा ही इसे दुनिया में सबसे खास बनाता है. हालांकि इस ऊंचाई के पीछे भी खास कारण है. मूर्ति के 182 मीटर होने के पीछे कई तर्क दिए जा रहे हैं और इसे कई चीजों से जोड़ा जा रहा है. बता दें, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की कुल ऊंचाई 93 मीटर है, जिसमें मूर्ति सिर्फ 46 मीटर की है.

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तर्क दिया जा रहा है कि इस मूर्ति की ऊंचाई एक आम इंसान की लंबाई से 100 गुना है. माना जाता है कि एक आम इंसान की लंबाई 6 फीट होती है और इसका 100 गुना 600 फीट है. वहीं अगर 600 फीट को मीटर में बदला जाता है तो यह करीब 182 (182.88) मीटर होता है.

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हालांकि मूर्ति की ऊंचाई को लेकर जो बातें कही जा रही हैं इसमें राजनीतिक कारण और अन्य तर्क भी शामिल है. हालांकि इसकी अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का कुल वजन 1700 टन है. इसके पैर की ऊंचाई 80 फीट, हाथ की ऊंचाई 70 फीट, कंधे की ऊंचाई 140 फीट और चेहरे की ऊंचाई 70 फीट है. सरदार पटेल की इस मूर्ति को बनाने में करीब 3 हजार करोड़ रुपये का खर्च आया था.


सभी तस्वीरें 'स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी' की वेबसाइट से ली गई है.

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रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जा रहा है कि 'स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी' (93 मीटर) की दोगुनी सरदार की ये मूर्ति कुछ साल तक दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति कहलाई जाएगी. बता दें, गुजरात में बने 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' से भी बड़ा छत्रपति शिवाजी का स्टैच्यू मुंबई में अरब सागर में बनाया जाएगा जो दुनिया का सबसे बड़ा स्टैच्यू कहलाया जाएगा. 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' की ऊंचाई जहां 182 मीटर है वहीं शिवाजी के स्टैच्यू की ऊंचाई 212 मीटर होगी. जो सरदार की विशाल मूर्ति से 30 मीटर ज्यादा होगी. बताया जा रहा है इस मूर्ति को बनाने में 3643.78 करोड़ का खर्चा आएगा. सरकार ने कहा है शिवाजी का ये विशाल स्टैच्यू  2021 तक  बन जाएगी.






(शिवाजी के भावी स्टैच्यू का प्रस्तावित मॉडल)

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