जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर आतंकी हमले में 40 जवान (अब तक) शहीद हो गए हैं. वहीं हमले में मारे गए जवान सरकारी रिकॉर्ड में 'शहीद' नहीं कहलाएंगे कहलाएं जाएंगे. दरअसल सीआरपीएफ ऐसी फोर्स से है जिसे पैरामिलिट्री कहते हैं. अगर उनके जवान अगर ड्यूटी के दौरान मारे जाते हैं तो उनको शहीद का दर्जा नहीं मिलता है. वहीं जब भी बात जवानों की आती है तो भारतीय सेना का नाम सबसे पहले लिया जाता है, लेकिन ये कम ही लोग जानते हैं CRPF के जवान भारतीय सेना से कम नहीं होते हैं. उन्हें भी मुश्किल चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. आज हम आपको बताते हैं CRPF कौन हैं और वह कैसे भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधे मिलाकर काम कर रहे हैं. और देश के लिए ये कितने महत्वपूर्ण है.
CRPF की फुल फॉर्म 'सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स' है. ये भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल है. आपको बता दें, सुरक्षा के दो पहलू होते हैं. एक वो जो बॉडर पर भारतीय सेना और बीएसएफ तैनात है वहीं दूसरा पहलू आता है जिसे हम 'आंतरिक सुरक्षा' कहते हैं. वहीं CRPF एक ऐसी सेना है जो देश को अंदर से मजबूती देने के लिए हमेशा तैयार है.
भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बल भारत की सुरक्षा के लिए हमेशा खड़े रहते हैं. देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा में भारतीय सेना के साथ सीआरपीएफ, बीएसफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी का अहम योगदान होता है.
भारत कई सुरक्षा बल गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं, जिसमें सीआरपीएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, आसाम राइफल्स और एसएसबी शामिल है. वहीं सेना में भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना आते हैं. किसी भी स्थिति में देश को जरूरत पड़ने पर CRPF को ही बुलाया जाता है.
CRPF एक ऐसी सेना है जो आपको दिख जाएगी, चाहे वो इलेक्शन के दौरान, संसद, कश्मीर हर उस जगह दिख जाएंगे, जहां देश को जरूरत है. वहीं आपने हमेशा देखा होगा कोई भी अचानक घटना होती है जहां जवानों की भारी तदाद में जरूरत है वहां CRPF के जवान मौजूद रहेंगे. जब भी राष्ट्र पर को जरूरत होती है ये सेना हमेशा तैयार करते हैं. कई बार भारतीय सेना के साथ CRPF के जवानों ने भी युद्ध का हिस्सा लिया है.
वीआईपी सिक्योरिटी में भी मुख्यतौर पर भी यहीं जवान ही होते हैं. वहीं सुविधाओं के नाम पर जो सहूलियतें भारतीय सेना को मिलती हैं, वैसी सुविधाएं CRPF के जवानों को नहीं मिलती है.
ये होती है CRPF की जिम्मेदारी: CRPF को अलग- अलग तरह की जिम्मेदारी दी जाती है. जिसमें भीड़ को नियंत्रण करना, दंगों से निपटना, आंतकियों को मार गिरान या उन्हें हटाने के लिए ऑपरेशन करना, माओवादियों से निपटना, हिंसक क्षेत्रों में चुनाओं के दौरान राज्य पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना, युद्धकाल के दौरान आक्रमक तरीके से लड़ना और प्राकृतिक आपदाओं के समय में बचाव और राहत कार्य करना.
हालांकि मुश्किल से मुश्किल कठिनाईयों के CRPF के जवान हमेशा देश और देश के लोगों के लिए तैयार रहते हैं. वहीं 'द इकोनॉमिक्स' टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 तक जम्मू और कश्मीर हिंसा को रोकने के लिए 70,000 से अधिक CRPF के जवान तैनात किए गए थे.
सीआरपीएफ के जवानों को सीमा पर तैनात किया जाता है, जबकि भारतीय सेना के जवान सीमा से दूर रहते हैं और युद्ध के लिए खुद को तैयार करते हैं. साथ ही यह क्रॉस बोर्डर ऑपरेशन भी करती है. वहीं आपको बता दें, भारतीय सेना के जवानों को सीआरपीएफ के जवानों से ज्यादा सुविधा मिलती है, इसमें कैंटीन, आर्मी स्कूल आदि की सेवाएं शामिल है.
भारतीय सेना में रैंक लेफ्टिनेंट, मेजर, कर्नल, ब्रिगेडियर, मेजर जर्नल आदि होती है, लेकिन सीआरपीएफ में पोस्ट कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, एएसआई, डीएआई, आईजी आदि होती है.
भारतीय सेना में अधिकारी एनडीए और सीडीएस (कंबाइड डिफेंस सर्विस) के माध्यम
से चुने जाते हैं और इस परीक्षा का चयन यूपीएससी की ओर से किया जाता है.
वहीं सीआरपीएफ में भर्ती के लिए हर साल कई परीक्षाओं का आयोजन किया जाता
है. इनमें से कांस्टेबल परीक्षा ज्यादा महत्वपूर्ण होती है. बता दें,
सीआरपीएफ में कांस्टेबल, तकनीकी और ट्रेडसमैन,दरोगा यानी इंस्पेक्टर से
लेकर कई अन्य तरह के पद होते हैं. यहां महिलाओं और पुरुषों दोनों की भर्ती
की जाती है. आपको बता दें, सीआरपीएफ के साथ देश की सुरक्षा के लिए बीएसफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी का अहम योगदान होता है.
(सभी फोटोज CRPF के फेसबुक पेज से)