यूपीएससी परीक्षा के परिणाम आने के बाद कई उम्मीदवारों की प्रेरणादायक कहानी पढ़ने और सुनने को मिल रही है. वहीं एक ऐसी ही कहानी है बिहार के गया जिले के रहने वाले एक शाहिद रजा खान की है जिन्होंने यूपीएससी परीक्षा में 751 रैंक हासिल की है.
शाहिद रजा खान ने अपने शुरूआती शिक्षा
अपने गांव और फिर उत्तर प्रदेश केआजमगढ़
के एक मदरसे से हासिल की है. आपको बता दें, मदरसे में पढ़ाई
पूरी करके रजा ने मौलवी की पदवी हासिल
की.
उन्होंने बताया ''मेरी शुरुआती पढ़ाई एक छोटे
से गांव के कस्बे में हुई. इसके बाद मैं आगे
की पढ़ाई के लिए आजमगढ़ के मुबारकपुर
स्थित अल जमातुल अशर्फिया चला गया. बता
दें, वर्तमान में वह जवाहरलाल नेहरू
यूनिवर्सिटी (JNU) से पीएचडी (PhD)
कर रहे हैं.
मदरसे में पढ़ाई करने के दौरान ही वह सिविल
सर्विसेज में जाने के लिए इच्छुक थे. जिसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी.
मां ने किया सपोर्ट
रजा ने बताया कि मदरसे में पढ़ने के दौरान
ही मैं यूपीएससी परीक्षा देने के लिए इच्छुक
था. ऐसे में मेरी मां ने मेरा हर तरह से साथ दिया.
रजा ने बताया कि उनकी मां उन्हें हमेशा पढ़ाई
के लिए प्रेरित किया. जीवन में मैं जो भी कुछ चाहता था उसके लिए मेरी मां ने मुझे हमेशा प्रेरित किया. उन्होंने हमेशा मेरी पढ़ाई का ध्यान रखा.
मदरसे से पढ़ाई कर मौलवी बने रजा ने कहा ''कोई भी मदरसा, मस्जिद या फिर धर्म
रूढ़िवादी नहीं होना चाहिए. धर्म हमें मानवता की सेवा करना सिखाता है, मैं भी यही करूंगा.'' उनकी इस बात पर लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं.
यहीं नहीं रजा ने अपनी सफलताओं का श्रेय मदरसा को भी दिया है. उन्होंने बताया कि मदरसा में मैंने जो भी शिक्षा ग्रहण की है उसकी वजह से मैं एक अच्छा इंसान बन पाया हूं. मदरसे ने मेरे अंदर आत्मविश्वास जगाया साथ ही मुझे ईमानदार और भरोसेमंद व्यक्ति बनाया.
आपको बता दें, यूपीएससी परीक्षा के परिणाम 9 अप्रैल को जारी किए गए थे, जिसमें कुल 759 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की थी. जिनमें 30 मुस्लिम उम्मीदवारों ने यूपीएससी परीक्षा पास की है.
वहीं उत्तर प्रदेश के जुनैद अहमद ने तीसरा स्थान हासिल किया है. बता दें, यूपीएससी परीक्षा 2017 में 990 उम्मीदवारों में से 52 मुस्लिम उम्मीदवार पास हुए थे.