राष्ट्रपति ने दिल्ली सरकार में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करार दिया है. राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग के फैसले पर मुहर लगा दी है. आप के इन विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किए जाने को लेकर ये फैसला आया है. आइए जानते हैं संसदीय सचिव क्या होता है और इसका क्या काम होता है?
बता दें कि चुनाव आयोग ने 20 विधायकों की सदस्यता खत्म करने की सिफारिश की
थी और उन्हें अयोग्य करार दिया गया है. चुनाव आयोग के अनुसार संसदीय सचिव
का पद लाभ का पद होता है और कोई भी विधायक लाभ के पद पर आसीन नहीं रह सकता.
इसलिए आप के विधायकों की सदस्यता पर संकट गहरा रहा है.
क्या होता है संसदीय सचिव- संसदीय सचिव वेस्टमिनस्टर प्रणाली में वो सदस्य होता है, जो अपने कर्तव्यों के साथ मंत्री की सहायता करता है. यह एक वित्तीय लाभ का पद माना जाता है और जिस मंत्री का संसदीय सचिव होता है, वो उसकी मदद करता है.
क्या होता है लाभ- किसी भी मंत्री के संसदीय सचिव को मंत्री के मदद के लिए सैलरी, कार और अन्य सुविधाएं दी जाती है, इसलिए इसे लाभ का पद माना जाता है और चुनाव आयोग के अनुसार कोई भी लॉंमेकर लाभ के पद पर काम नहीं कर सकता है.
मंत्री खुद इस काम के लिए अन्य व्यक्ति का चयन करता है. यह व्यक्ति किसी आयोग, बोर्ड, निगम आदि में से हो सकता है.
बता दें कि कई देशों में मंत्रियों के साथ संसदीय सचिव होना एक परंपरा है. दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों में भी संसदीय सचिव होते हैं, जो कि विधायक या सांसद नहीं होते है.
चुनाव आयोग भले ही संसदीय सचिव को लाभ का पद मानती है, लेकिन आप का कहना है कि विधायकों ने इस पद के लिए कोई सैलरी या कोई सुविधा का इस्तेमाल नहीं किया है. इसके लिए आप ने जून 2015 में दिल्ली असेंबली रिमूअल ऑफ डिस्क्वालिफिकेश एक्ट 1997 में संशोधन भी किया था.
बता दें कि जिन विधायकों की सदस्यता रद्द की गई है, उसमें प्रवीण कुमार, शरद कुमार, आदर्श शास्त्री, मदन लाल, शिव चरण गोयल, सरिता सिंह, नरेश यादव, जरनैल सिंह, राजेश गुप्ता, अलका लांबा, नितिन त्यागी, संजीव झा, कैलाश गहलोत, विजेंद्र गर्ग, राजेश ऋषि आदि का नाम शामिल है.