शाम गुलाबी, शहर गुलाबी, पहर गुलाबी है...गुलाबी ये शहर... ऐसा ही कुछ नजारा जयपुर का है. पिंक सिटी कहे जाने वाले जयपुर में आप गुलाबी इफेक्ट आसानी से देख सकते हैं. यहां की दुकान, मकान, बाजार, गेट सभी गुलाबी हैं, जहां जाकर आप खुद ही समझ जाएंगे... कि आप पिंकसिटी यानी जयपुर है. लेकिन आज जानते हैं कि इस शहर का नाम गुलाबी नगर क्यों पड़ा...
पहले आपको जयपुर के बारे में बताते हैं. दरअसल जयपुर राजस्थान की राजधानी और एक खूबसूरत शहर है. इसकी स्थापना साल 1727-1728 में की गई थी. ये महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय का दौर था और वो आमेर के महाराजा थे. महाराजा जयसिंह के नाम पर ही इसका नाम जयपुर रखा गया.
कहा जाता है कि पहले यह ढूंढाड़ क्षेत्र की राजधानी थी. प्राचीनकाल में यह अम्बावती और अंबिकापुर के नाम से जाना जाता था. बता दें कि राजस्थान कई हिस्सों में बंटा है, जिसमें मारवाड़, मेवाड़, ढूंढाड़, शेखावाटी आदि नाम शामिल है. ढूंढ़ाड़ में पूर्वी राजस्थान के कुछ जिले आते हैं.
दरअसल, जयपुर की स्थापना के 100 साल से भी ज्यादा समय बाद इस नगर को गुलाबी नगर की संज्ञा दी गई. इससे पहले इस शहर को केवल जयपुर के ही नाम से जाना जाता था. उस वक्त यह अन्य शहरों की तरह ही था. लेकिन 1818 में इसके गुलाबी होने की कहानी शुरू हुई.
जयपुर ने 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ संधि की औक इसके साथ ही जयपुर के आधुनिकीकरण का दौर भी शुरू हो गया. साल 1876 में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ और प्रिंस ऑफ वेल्स युवराज अल्बर्ट जयपुर आने वाले थे. उस समय जयपुर के महाराजा सवाई रामसिंह इनकी तैयारियों में जुटे थे.
महारानी के स्वागत के लिए पूरे शहर को सजाया गया और इसकी थीम रखी गई गुलाबी. उस दौरान महाराजा सवाई रामसिंह ने उन्होंने उच्च अधिकारियों से बातचीत कर परकोटे को को गुलाबी रंग से रंग दिया और आज भी परकोटे में सबकुछ गुलाबी है. इसके बाद से शहर का नाम गुलाबी नगर पड़ा.