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ब्रिटिश शासन में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के लिए जाना जाता था कासगंज

मोहित पारीक
  • 29 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 10:16 AM IST
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कासगंज सांप्रदायिक हिंसा की आग में जल रहा है. अभी भी कासगंज में तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं. हिंसा में एक युवक की मौत हो गई है और भारी जनसंपत्ति की हानि हुई है. हालांकि पुलिस ने 112 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. हिंसा से जुड़ी खबरें तो आपने पढ़ी होगी, लेकिन क्या आप कासगंज के इतिहास के बारे में जानते हैं? आइए जानते हैं कासगंज से जुड़ी हर वो बात, जो आप शायद ही जानते होंगे...

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कासगंज उत्तर प्रदेश का एक जिला है, जिसे 17 अप्रैल 2008 को एटा जिले से अलग कर बनाया गया था. इस जिले के प्रमुख इलाकों में सोरोन, पाटिआली, नादरी आदि शामिल है और यहां तीन तहसीस कासगंज, पाटिआली और साहावर है. यह जिला 1993.8 स्कवायर किलोमीटर में फैला हुआ है.

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कासगंज में कानून- व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10 पुलिस स्टेशन हैं. यह शहर काली नदी के लिए भी मशहूर है. कासगंज को यहां के लक्ष्मी सिनेमा के लिए भी जाना जाता है, क्योंकि यह प्रदेश के सबसे बड़े थियेटर्स में से एक है.

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अगर कासगंज शहर की बात करें तो 2011 की जनगणना के अनुसार यहां 75.34 फीसदी हिंदू, 22.94 फीसदी मुस्लिम, .68 फीसदी बौद्ध, .56 फीसदी ईसाई और .21 फीसदी सिख लोग रहते हैं.

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विकिपीडिया के अनुसार मुगल और ब्रिटिश काल में कासगंज को तनय या खासगंज के नाम से जाना जाता था. इतिहासकार विलियन विल्सन हंटर के अनुसार ब्रिटिश शासन के दौरान विलिम गार्डनर यहां ही रहते थे, जो कि भारतीय सेना में अधिकारी थे और भारतीय सेना की सबसे डेकोरेटेड रेजिमेंट 2nd Lancers के लिए जाने जाते हैं.

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अंग्रेजी शासन के दौरान कई इतिहासकार रिसर्च के लिए कासगंज आए थे. कासगंज के जिक्र कई विदेशी इतिहासकारों की किताबों में मिलता है. इसकी स्थापना का साल 1986 बताया जाता है. वहीं कासगंज के आस-पास के गांव अतरंजी खेरा और जाखेरा पुरातत्व विभाग के लिए काफी महत्वपूर्ण है. यहां आज भी रिसर्च जारी है और यहां 1200 से 300 बीसी तक के इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है.

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कहा जाता है कि कासगंज को अपने सौहार्द और भाईचारे के लिए जाना जाता था. यहां हिंदू-मुस्लिम के साथ ईसाई और सिख भी क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा थे और सभी आपसी भाईचारे के साथ रहते थे. इस बात का प्रमाण कई ऐतिहासिक हस्तिलिपियों में दर्ज है, जो कि माहिंदर मन सिंह, नावबजादा हाजी अब्दुल सत्तर अली  खान, सेठ जानकी प्रसाद आदि लोगों के परिवार के पास मौजूद है.

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कासगंज शिक्षा की दृष्टि से भी सराहनीय काम कर रहा है, यहां कई इंटर कॉलेज, आईटीआई कॉलेज, पॉलीटेक्निक कॉलेज, डिग्री कॉलेज, पोस्ट ग्रेजुएशन कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज हैं. राजनीतिक इतिहास से भी यह काफी अहम है, क्योंकि 1974 के बाद से कहा जाता है कि यहां जो पार्टी जीत दर्ज करती है, वो ही प्रदेश में सरकार बनाती है.

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