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PAK में भारत से बहुत कम है इनकम टैक्स: सैलरी- 12 लाख, टैक्स- 00

मोहित पारीक
  • 30 जनवरी 2019,
  • अपडेटेड 7:49 PM IST
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1 फरवरी को पेश किए गए अंतरिम बजट में घोषणा की गई है कि अब पांच लाख रुपये तक की करयोग्य आय वाले लोगों को कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा. लेकिन यह जानना आपके लिए दिलचस्प हो सकता है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में टैक्स की क्या स्थिति है और जनता को कितनी कमाई पर टैक्स देना होता है...

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भारत में हर साल फरवरी के पहले दिन बजट पेश होता है, जो पहले मार्च में होता था. लेकिन, पाकिस्तान में बजट अप्रैल के आखिर या मई के शुरू में जारी किया जाता है, जिसमें जुलाई से जून तक का लेखा-जोखा दिया जाता है. पाकिस्तान के बजट में रक्षा बजट काफी अहम होता है, जिसे पिछले साल भी बढ़ा दिया गया था.      

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बता दें कि पाकिस्तान में रक्षा बजट पर न तो संसद के भीतर या बाहर कोई चर्चा होती है और न ही सरकार और सेना इसकी विस्तृत जानकारी देते हैं. पाकिस्तान सरकार ने 2018-19 के लिए संसद में 5,661 अरब रुपये का बजट पेश किया था, रक्षा बजट में करीब 10 फीसदी की भारी बढ़ोतरी की गई थी.

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अगर इनकम टैक्स की बात करें तो पाकिस्तान में सैलरी प्राप्त करने वाले और खुद का काम करने वाले लोगों के लिए अलग- अलग टैक्स की व्यवस्था है. पिछले साल तब के प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने आयकर पर बड़ी छूट देने का ऐलान किया था. जिसमें 12 लाख रुपये तक की सालाना आय को कर मुक्त कर दिया गया था, जो राशि पहले 4 लाख रुपये थी.

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इससे पहले पाकिस्तान में आयकर के 7 स्लैब थे, जिसे अब 4 कर दिया गया है, जिसमें 5 से 15 फीसदी टैक्स शामिल है. इससे पहले 10 फीसदी से 35 फीसदी तक टैक्स लिया जाता था.

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नौकरीपेशा लोग फायदे में
अब पाकिस्तान में 12 लाख रुपये सालाना यानी एक लाख रुपये महीने सैलरी वाले लोगों को टैक्स नहीं देना होता है और वो टैक्स स्लैब से बाहर होते हैं. वहीं, 12 लाख से 24 लाख रुपये के बीच वेतन पाने वाले लोगों को 5 फीसदी, 2400001 से 4800000 रुपये वेतन वाले को 10 फीसदी टैक्स और 4800001 से ज्यादा का वेतन पाने वालों को 15 फीसदी टैक्स का भुगतान करना होता है.

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सिर्फ 7 लाख लोग देते हैं टैक्स
बता दें कि पाकिस्तान में सिर्फ 12 लाख पाकिस्तानी इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं और इनमें से सात लाख लोग ही टैक्स का भुगतान करते हैं.

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वहीं, नौकरीपेशा के अलावा अन्य लोगों को 4 लाख रुपये सालाना कमाई तक टैक्स का भुगतान नहीं करना होता. वहीं, 4 लाख से 5 लाख रुपये आय वाले लोगों को अधिक आय का 7 फीसदी टैक्स देना होता है. उसके बाद 5 लाख से साढ़े सात लाख की कमाई करने वाले लोगों को 7 हजार रुपये और 10 फीसदी टैक्स का भुगतान करना होता है.

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