हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और
जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) सरकार का पहला
मंत्रिमंडल विस्तार गुरुवार को हुआ. जिसमें 10
मंत्रियों के साथ संदीप सिंह ने भी राज्य मंत्री के
तौर पर शपथ ली. संदीप सिंह की कहानी काफी दिलचस्प है. वह भारतीय
हॉकी टीम के पूर्व कप्तान रह चुके हैं. वहीं एक बार गोली के शिकार भी हो चुके हैं जिसके बाद उनकी पूरी जिंदगी बदल गई.
दिलजीत दोसांझ और तापसी पन्नू स्टारर फिल्म
‘सूरमा’ उन्हीं पर ही आधारित थी. फिल्म उनके
जीवन के बारे में दिखाया गया है कि कैसे गोली
लगने के बाद 3 साल के लिए संदीप सिंह
पैरालाइज हो जाते हैं और उसके बाद 2008 में
भारतीय हॉकी टीम में वापस लौटते हैं.
संदीप सिंह का जन्म 27 फरवरी 1986 को हुआ
था. वह हरियाणा के कुरुक्षेत्र से हैं. 33 साल के
संदीप ने साल 2004 में सुल्तान अजलान शाह कप
के दौरान भारतीय हॉकी टीम में प्रवेश किया था.
इसके बाद चर्चित हुए. वह भारतीय पेनल्टी कॉर्नर
स्पेशलिस्ट और दुनिया के बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर के
तौर पर भी जाने गए.
अनजाने में हुए गोली के शिकार
संदीप सिंह के लिए वो वक्त न भूलने वाला है जब वह
एक दर्दनाक हादसे के शिकार हुए थे. उन्हें
विश्व कप में हिस्सा लेने जर्मनी जाना था और वह
अपने टीम के साथियों के साथ के लिए कालका
शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली आ रहे थे. रेलवे
प्रोटेक्शन फोर्स के एक जवान की बंदूक से गलती
वश गोली चल गई और जाकर संदीप सिंह के कमर
के निचले हिस्से में लगी. इसके बाद उनके जीवन के संघर्ष की असली कहानी शुरू हुई.
किसी ने नहीं सोचा था कि देश के लिए खेलने
वाला एक खिलाड़ी जिंदगी की लड़ाई लड़ेगा. गोली
लगने के 2 साल के लिए संदीप लगभग व्हील
चेयर पर रहे. सभी उम्मीद खो चुके थे कि वह कभी मैदान पर उतरेंगे.
लेकिन कहते हैं एक खिलाड़ी किसी भी खेल को पकड़ लें उसे तब तक खेलना नहीं छोड़ता जब तक उसकी सांस न चली जाए. संदीप सिंह ने फिर से खेलने का फैसला किया. दोस्त- परिवार उम्मीद खो चुके थे पर देश के लिए संदीप सिंह को खेलना ही था और वह 2 साल तक संघर्ष करने के बाद संदीप सिंह ने हॉकी के मैदान में दोबारा वापसी की.
वापसी करने के बाद ‘सुल्तान अजलान कप’ में संदीप सिंह की मौजूदगी में भारत ने दमदार प्रदर्शन किया था. साल 2009 में संदीप सिंह को भारतीय हॉकी टीम का कप्तान घोषित किया गया था.
संदीप सिंह ने बताया जब उन्हें गोली लगी थी को ऐसा महसूस हुआ किसी ने मेरे पीठ पर लोहे की रोड़ घुसा दी हो. उन्होंने कहा गोली लगने के बाद अचानक एक आदमी आता है मेरे पास और कहता है कि मुझसे गलती से गोली चल गई है. उन्होंने बताया, ''इस घटना के बाद हॉस्पिटल पहुंचने से पहले मेरा बहुत सारा खून बह गया था. जब अस्पताल पहुंचा तो वहां डॉक्टर्स ने भी मेरी हालत देखकर सारी उम्मीदें खो दी थी. लेकिन मैं बच गया. इसकी वजह सिर्फ मेरी इच्छा शक्ति और समर्पण था."
उन्होंने कहा जीवन में आपको कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. आपको तय करना है आपका क्या टारगेट है. बस अपना जीवन उसे पूरा करने में लगा दीजिए.
Image credit: Reuters