भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को हुआ था. जब वे अंतरिक्ष पहुंची तो साथ में श्रीमदभगवतगीता की प्रति और गणेश जी की छोटी सी प्रतिमा साथ ले गई थीं. दरअसल उन्हें ये संस्कार अपने पिता दीपक पांड्या से मिले. जिन्होंने अपने बच्चों को बचपन से ही गीता सार सिखाया था. अंतरिक्ष प्रवास के दौरान सुनीता ने धर्मग्रंथों के श्लोक भी पढ़े थे
'हिलसाइड एलीमेंटरी स्कूल' से प्रारंभिक शिक्षा के बाद सुनीता 'न्यूमैन जूनियर हाई स्कूल' गईं. फिर 'चीडहैम हाई स्कूल' से 12वीं की परीक्षा पास की.
सुनीता एक बार फेल भी हुईं. पर उन्होंने मनोबल नहीं तोड़ा और कड़े परिश्रम से आगे बढ़ीं. धीरे-धीरे वह स्कूल के अच्छे विद्यार्थियों में गिने जानी लगीं.
सुनीता को बचपन से ही अंतरिक्ष के प्रति गहरा लगाव था. जब वह 4-5 साल की थी तो उन्होंने टीवी पर नील आर्मस्ट्रॉन्ग को चंद्रमा पर चहलकदमी करते देखा. वह दृश्य सुनीता के मन-मस्तिष्क में बस गया.
सुनीता ने 1987 में यूएस नेवल अकादमी से फिजिकल साइंस में बीएस किया. पिफ 1995 में एमएस इंजीनियरिंग मैनेजमेंट फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से शिक्षा हासिल की.
यूएस स्टेट नेवल अकादमी में ही सुनीता की मुलाकात माइकल से हुई. वे उनके सहपाठी थी. दोनों पक्के दोस्त बने फिर शादी कर ली.
सुनीता अमरीका नौसेना में पायलट रही हैं. उन्होंने हैलीकॉप्टर भी उड़ाए लेकिन अंतरिक्ष में जाने की इच्छा बरकरार रही. वह लगातार प्रयास करती रहीं और 1998 में उन्हें एस्ट्रोनॉट प्रोग्राम के लिए चुन लिया गया.
(अन्तरिक्ष में अद्भुत प्रयास- सुनीता विलियम्स नामक किताब से साभार)