पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की आज 74वीं जयंती है. उनका जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था. उनके कार्यकाल में कई ऐसे सैन्य ऑपरेशन सफल रहे जिसमें भारत को जीत हासिल हुई. आइए जानते हैं उन्हीं ऑपरेशंस के बारे में....
ऑपरेशन राजीव: इस ऑपरेशन की शुरूआत 1987 में की गई थी. भारतीय सशस्त्र बलों ने इसका कोड नाम 'ऑपरेशन राजीव' दिया था. इस युद्ध का स्थान सियाचिन ग्लेशियर था. यह युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच आयोजित किया गया था. जिसमें भारत ने इस युद्ध में जीत हासिल की थी.
ऑपरेशन पवन: इस ऑपरेशन की शुरुआत भी 1987 में की गई थी. भारतीय शांति रखरखाव बल (IPKF) ने इसका कोड नाम 'ऑपरेशन पवन' दिया था. ये युद्ध श्रीलंका में हुआ था जिसमें भारत के हिस्से में जीत आई.
ऑपरेशन विराट: इस ऑपरेशन की शुरुआत भी 1988 में की गई थी. भारतीय शांति रखरखाव बल (IPKF) ने इसका कोड नाम 'ऑपरेशन विराट' दिया था. ये युद्ध भी श्रीलंका में हुआ था. IPKF ने उस दौरान दो ऑपरेशन लान्च किए थे. जिसमें 1. ऑपरेशन विराट, 2. ऑपरेशन त्रिशूल था. इसमें भी भारत को जीत हासिल हुई थी.
ऑपरेशन त्रिशूल: इस ऑपरेशन की शुरुआत भी 1988 में की गई थी. भारतीय शांति रखरखाव बल (IPKF) ने इसका कोड नाम 'ऑपरेशन त्रिशूल' दिया था. ये युद्ध भी श्रीलंका में हुआ था. IPKF ने उस दौरान दो ऑपरेशन लान्च किए थे. जिसमें 1. ऑपरेशन विराट, 2. ऑपरेशन त्रिशूल था.
ऑपरेशन चेकमेट : इस ऑपरेशन की शुरुआत साल 1988 में हुई थी. भारतीय शांति रखरखाव बल (IPKF) ने इसका कोड नाम 'ऑपरेशन चेकमेट' दिया था. यह ऑपरेशन भारतीय शांति रखरखाव बल (IPKF) की ओर से आयोजित किया गया था. जिसका उद्देश्य लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) का बहिष्कार करना था. भारत को इस युद्ध में जीत हासिल हुई.
ऑपरेशन कैक्टस: साल 1988 में मौमूल अब्दुल गयूम मालदीव के राष्ट्रपति थे, इस दौरान श्रीलंकाई विद्रोहियों की मदद से मालदीव में विद्रोह की कोशिश की गई. राष्ट्रपति गयूम ने पाकिस्तान, श्रीलंका और अमेरिका समेत कई देशों को मदद के लिए संदेश भेजा. किसी भी दूसरे देश से पहले भारत के तात्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मालदीव की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया. फिर शुरू हुआ 'ऑपरेशन कैक्टस'. इस ऑपरेशन की शुरुआत साल 1988 में की गई थी. मालदीव में विद्रोहियों का दमन करने के लिए भारतीय सेना ने वहां युद्ध लड़ा था जिसकी पूरी दुनिया में प्रशंसा की गई थी.
इस युद्ध का स्थान हिंद महासागर (मालदीव) था. 1988 के उस दौर को जब भारत की राजीव गांधी सरकार ने मालदीव के पहले सियासी संकट में संकटमोचक की भूमिका निभाई थी.
बता दें, ये सभी ऑपरेशंस राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान सफल रहे थे. वह साल 1984 से 1989 तक देश के प्रधानमंत्री रहे थे.