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जानेंः कैसे काम करती है CBI, कितनी पावरफुल है ये जांच एजेंसी

प्रियंका शर्मा
  • 25 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 1:49 PM IST
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सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन (CBI) देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी है. इन दिनों सीबीआई अपने दो शीर्ष अधिकारियों (निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना) में जंग और उन पर कार्रवाई को लेकर चर्चा में बनी हुई है. ऐसे में सीबीआई ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया है. आइए जानते हैं कि CBI के पास क्या अधिकार होते हैं और वहां किस तरीके से काम किया जाता है.

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सीबीआई का गठन 1963 में हुआ था. सीबीआई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले अपराधों जैसे हत्या, घोटालों और भ्रष्टाचार के मामलों और राष्ट्रीय हितों से संबंधित अपराधों की भारत सरकार की तरफ से जांच करती है.

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सीबीआई के गठन होने के बाद निम्नलिखित भागों में बांटा गया था- एंटी करप्शन डिवीजन, इकोनॉमिक्स ऑफेंस डिवीजन, स्पेशल क्राइम डिवीजन, डायरेक्टरेट ऑफ प्रॉसिक्यूशन, एडमिनिस्ट्रेटिव डिवीजन, पॉलिसी एंड कॉर्डिनेट डिवीजन और सेट्रल फॉरिसिक साइंस लेब्रोरिटी.

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ऐसे होता है काम- (A)एंटी करप्शन डिवीजन- केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों, केंद्रीय पब्लिक उपक्रमों और केंद्रीय वित्तीय संस्थानों से जुड़े भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से संबंधित मामलों की जांच करने के लिए. (B) इकोनॉमिक्स ऑफेंस  डिवीजन – बैंक धोखाधड़ी, वित्तीय धोखाधड़ी, आयात-निर्या और विदेशी मुद्रा अतिक्रमण, नारकोटिक्स, पुरातन वस्तुएं, सांस्कृतिक संपत्ति की बढ़ती तस्करी और विनिषिद्ध वस्तुओं आदि की तस्करी से संबंधित. (C) स्पेशल क्राइम डिवीजन- आतंकवाद, बोम्ब ब्लास्ट, संवेदनात्मक मानव वध, मुक्ति-धन के लिए अपहरण और माफिया और अंडर-वर्ल्ड द्वारा किए गए अपराधों से संबंधित.


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अधिकार: बात अगर सीबीआई के अधिकारों की करें, तो करप्शन समेत अन्य मामलों को लेकर भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम की धारा 17 के तहत किसी अफसर के खिलाफ जांच करने के लिए सरकार की इजाजत लेने की जरूरत नहीं है. हालांकि कोर्ट ने कहा है कि सीबीआई जांच के आदेश देते वक्त कोर्ट को खास एहतियात बरतना होगा. जिसमें राज्य सरकारों की इजाजत लेने की जरूरत नहीं है.

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CBI में दो तरह के विंग होते हैं. पहला-  सामान्य अपराध विंग, दूसरा- आर्थिक अपराध विंग. सामान्य अपराध विंग समान्य अपराध की जांच करता है. वहीं आर्थिक अपराध विंग आर्थिक अपराध की जांच करता है.

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आपको बता दें, CBI की जांच से जुड़ी सुनवाई विशेष CBI अदालत में ही होती है. पहले सीबीआई केवल घूसखोरी और भ्रष्टाचार की जांच तक सीमित थी, लेकिन 1965 से हत्या, किडनैपिंग, आतंकवाद, वित्तीय अपराध, आदि की जांच भी सीबीआई के दायरे में आ गई.

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देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी होने के बावजूद सीबीआई की जांच आसान नहीं होती है. इसमें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. भारत सरकार की तरफ से मिले आदेश के बाद ही सीबीआई अपनी जांच प्रक्रिया शुरू करता है.

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भ्रष्टाचार से संबंधित कोई मामला दिखे तो सीबीआई को इस मामले में सीधे शिकायत की जा सकती है सीबीआई करप्शन के केस में शिकायत पर सीधे कार्रवाई कर सकती है और इसके लिए स्टेट या सेंटर की इजाजत की जरूरत नहीं है.

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सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर भी कई बार सवाल उठाए गए हैं. एक बार सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए 'पिंजरे में बंद तोता' और 'मालिक की आवाज़' बताया था. 

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