कश्मीर घाटी में सोशल मीडिया पर लगे बैन के बाद 16 साल के जीयान शफीक़ ने कश्मीरियों के लिए एक अलग ही फेसबुक बना डाला. जीयान ने इसे कैशबुक नाम दिया है.
जीयान शफीक़ कश्मीर के अनंतनाग जिले के रहने वाले हैं. शफीक ने हाल ही में दसवीं पास की है. उनकी वेबसाइट कैशबुक में दो दिन पहले 130 यूजर्स थे. वहीं, आज इसके कुल 1500 से ज्यादा यूजर्स हैं.
शफीक और उनके दोस्त उजेर जेन ने इस वेबसाइट को साल 2013 में ही बना दिया
था. तब शफीक केवल 13 के थे. वही, उनके दोस्त उजेर जेन 17 साल के थे.
शफीक के पिता सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. उन्होंने बचपन से ही उन्होंने शफीक को लैपटॉप पर काम करने दिया.
शफीक को किशोरावस्था से ही कोडिंग में काफी दिलचस्पी थी. शफीक ने जब एचटीएमएल टैग्स लिखने शुरू किए, उसकी कोडिंग में भी दिलचस्पी बढ़ने लगी.
एक वेब पोर्टल से बातचीत में शफीक ने बताया कि शुरू में कैशबुक इतना पॉपुलर नहीं हुआ था. हालांकि, लोग कैशबुक वेबसाइट इस्तेमाल कर रहे थे.
लेकिन "कुछ दिनों पहले मिले ईमेल से मुझे आश्चर्य हुआ क्योंकि लोग अब भी पुरानी कैशबुक वेबसाइट इस्तेमाल कर रहे थे. इसके बाद हम दोनों ने मिलकर फिर इस पर काम करना शुरू कर दिया.
वेबसाइट की खासियत बताते हुए शफीक कहते हैं कि यदि सर्वर कभी भी ब्लैकलिस्ट हो जाता है, तो दोनों तुरंत सर्वर बदलते हैं. इसमें मुश्किल से 5 से 10 मिनट लगते हैं और साइट फिर से आ जाती है.
सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक भी इतनी तेजी से काम नहीं करता और नतीजतन कश्मीरियों की पहुंच से बाहर हो जाता है."
यही नहीं कैशबुक बिजनेस को बढ़ाने का भी एक मंच देता है. यहां पर कश्मीरी अपना सामान भी बेच सकते हैं. कैशबुक की फिलहाल अपनी वेबसाइट है और एन्ड्रॉएड ऐप भी है. शफीक आईओएस ऐप भी जल्द लॉन्च करने वाले हैं.