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देश में पहली बार सैनिक स्कूल में पढ़ेंगी लड़कियां, ऐसा होगा रूटीन

प्रियंका शर्मा
  • 23 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 12:40 PM IST
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लखनऊ के कैप्टन मनोज पांडेय सैनिक स्कूल में ऐसा पहली बार हुआ है जब लड़कियों को एडमिशन दिया गया है. कक्षा 9वीं कक्षा में एडमिशन लेने के लिए करीब 2500 लड़कियों ने आवेदन किया था, जिनमें से 15 लड़कियों को चुना गया. आपको बता दें, कि इससे पहले इस स्कूल में सिर्फ लड़कों को ही एडमिशन दिया जाता था. जानें सैनिक स्कूल के बारे में... 

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लखनऊ के सैनिक स्कूल की स्थापना 15 जुलाई 1960 में की गई थी. तब ये देश का पहला सैनिक स्कूल था. इसके बाद देश के अन्य जगहों पर 27 सैनिक स्कूल खोल गए.हालांकि, बाद में कारगिल वॉर के हीरो शहीद मनोज पांडेय के नाम पर इस स्कूल का नाम रखा गया.

 

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यह सैनिक स्कूल देश का पहला स्कूल है जहां के छात्र मनोज पांडेय को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया है. जुलाई 2017 में यूपी सरकार की कैबिनेट बैठक में स्कूल का सैनिक स्कूल का नाम 'कैप्टन मनोज पांडेय सैनिक' स्कूल किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी.

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कौन थे कैप्टन मनोज पांडेय: साल 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ करगिल की लड़ाई में लड़ते हुए कैप्टन मनोज पांडेय शहीद हो गए थे. आपको बता दें कि वह उत्तर प्रदेश के सीतापुर निवासी थे. करगिल युद्ध में साहस दिखाने पर उन्हें वीरता के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र (मरणोपरांत)  से सम्मानित भी किया गया था. पाकिस्तान के खिलाफ करगिल युद्ध के कठिन मोर्चों में एक मोर्चा खालूबार का था, यह सबसे मुश्किल इलाका था.पांडेय ने 1/11 गोरखा राइफल्स की अगुवाई की थी. जब वह शहीद हुए उस समय उनकी उम्र 24 साल की थी.

 

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ऐसे हुआ लड़कियों का सेलेक्शन- सैनिक स्कूल में एडमिशन लेने के लिए देशभर में से करीब 2500 लड़कियां एंट्रेंस एग्जाम में बैठी थीं. जिसमें से 15 लड़कियां चुनी गईं.

 

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कैसे दी जाती है शिक्षा:  सैनिक स्कूल राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में एडमिशन के लिए युवाओं को तैयार करने के साथ उन्हें शैक्षिक वातावरण भी उपलब्ध कराते हैं. बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास के लिए सैनिक स्कूलों में एथलेटिक ट्रैक, क्रांसकंट्री ट्रैक, इंडोर गेम्स, बॉक्सिंग रिंग, फायरिंग रेंज, हार्स राइडिंग क्लब, माउंटेनरिंग क्लब, ट्रैकिंग क्लब, फाइन आट्र्स और क्राफ्ट वर्ग क्लब, म्यूजिक थियेटर आर्ट्स क्लब, ऐरो और शिप मॉडलिंग क्लब आदि की सुविधा दी जाती है.

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सैनिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में से बेहतरीन का चयन कर उन्हें राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से सैन्य तैयारी के लिए भेजा जाता है. इन स्कूलों में दी जाने वाली शिक्षा वह नींव बनती है जिसके आधार पर , आगे चल कर बच्चे देश का सशक्त सैनिक बनते हैं. आपको बता दें, यूपी के सैनिक स्कूल से इन 57 सालों में
1,000 से ज्यादा अधिकारी बन चुके हैं. 

 

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सैनिक स्कूल का रूटीन: सैनिक स्कूल के प्रिंसिपल कर्नल, अमित चटर्जी ने बताया छात्राओं को सुबह 6 बजे 1 घंटा एक्सरसाइज के लिए जाना होगा. फिर आठ बजे सबको ‘एसेंबली’ के लिए पहुंचना होगा. जिसके बाद 9 से 2 बजे तक क्लासेज चलेंगी. क्लासेज के बाद सभी स्टूडेंट्स जाकर आराम करेंगे. फिर आराम करने के बाद शाम चार बजे से पांच बजे के बीच स्पोर्ट्स एक्टिविटी करवाई जाएगी.

 

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चटर्जी का कहना है कि देश के सभी 27 सैनिक स्कूल केंद्र सरकार के अधीन हैं, जबकि यहां राजधानी लखनऊ का सैनिक स्कूल राज्य सरकार के अधीन है. अब तक केवल बालकों को ही कक्षा सात में सैनिक स्कूल में प्रवेश दिया जाता था.

 

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वहीं सैनिक स्कूल में लड़कियों को एडमिशन देने से पहले हॉस्टल तैयार करवाएं गए हैं ताकि लड़कियों को किसी भी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े.

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