आज मशहूर महाराजा भूपिंदर सिंह का 127वीं जयंती है. ये वही महाराजा हैं, जिन्हें पटियाला पैग को लेकर भी जाना जाता है. जी हां, शराब पीते वक्त या शराब पीने वालों से आपने पटियाला पेग का नाम सुना होगा, लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं आखिर इस पेग में क्या खास होता है और क्यों इसे पटियाला ही कहा जाता है और इसके पीछे की क्या कहानी है. (फाइल फोटो)
अक्सर लोग शराब पीते वक्त जब गिलास में शराब की मात्रा अधिक रखते हैं तो इसे पटियाला पैग कहते हैं. कहा जाता है कि पटियाला पेग में 60 एमएल से अधिक शराब होती है. इस पेग को पटियाला कहे जाने के पीछे दो कहानियां हैं, लेकिन दोनों महाराजा भूपिंदर सिंह से जुड़ी हुई है, इसलिए भूपिंदर सिंह को ही इसका आविष्कारक माना जाता है. (फोटो: getty images)
बताया जाता है कि एक बार महाराजा की टीम का आयरलैंड की टीम के साथ मैच था और आयरलैंड के खिलाड़ी मैच खेलने के लिए पटियाला आए थे. भूपिंदर सिंह चाहते थे कि यह मैच आयरलैंड नहीं जीते, इसलिए उन्होंने आयरलैंड को हराने के लिए यह प्लान बनाया. (फाइल फोटो)
उसके बाद मैच से पहले खिलाड़ियों को दावत के लिए बुलाया गया, जहां खिलाड़ियों को शराब पिलाने का कार्यक्रम भी था. दावत में जो शराब परोसी गई उसके पेग का साइज बड़ा था और उन्हें एक गिलास में ज्यादा शराब दी गई थी. (फाइल फोटो)
इस दौरान एक खिलाड़ी ने पूछा कि आखिर ये पैग इतना बड़ा क्यों है? तो महाराजा ने कहा था कि ये पटियाला पैग है और इतने ही बड़े होते हैं. इसके बाद से बड़े पैग यानी ज्यादा शराब वाले गिलास को पटियाला पेग कहा जाता है. (फाइल फोटो)
वहीं एक कहानी ये भी है कि महाराज भूपिंदर सिंह ने अंगुली से नापकर पैग बनाए थे और यह पेग उन्होंने बड़ी अंगुलियों से बनाए थे, जिससे ज्यादा गिलास में डाली गई थी. उसके बाद से ही पटियाला को बड़े पेग के साथ जोड़ा जाता है. (फाइल फोटो)
महाराजा भूपिंदर सिंह को अपने शौक और अलग मिजाज के लिए भी जाना जाता है. (फाइल फोटो)
उनका नाम कई रानियों, महंगी गाड़ियों और महंगे शौक के लिए लिया जाता है. (फाइल फोटो)
इतिहासकारों के मुताबिक महाराजा की 10 अधिकृत रानियों के समेत कुल 365 रानियां थीं. इन रानियों की सुख-सुविधा का महाराज पूरा ख्याल रखते थे. इन 365 रानियों के लिए पटियाला में भव्य महल बनाए गए थे. (फाइल फोटो)