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आजादी साथ लाई बंटवारे का बवंडर, जब खून के प्‍यासे हो गए थे लोग

aajtak.in
  • 15 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 2:01 PM IST
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15 अगस्‍त 1947 को देश को आजादी मिली. देश ब्रिटिश हुकूमत से आजाद तो हो गया लेकिन द्विराष्‍ट्र के सिद्धांत पर. यानी अंग्रेजों ने भारत को दो मुल्‍कों में बांट दिया. हिंदुस्‍तान और पाकिस्‍तान बने.

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भारत-पाकिस्‍तान का बंटवारा दुनिया के इतिहास में सबसे बड़े विस्‍थापन के रूप में भी याद किया जाता है. महज 50 से 60 दिनों के भीतर लाखों लोगों का विस्‍थापन हुआ.

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जैसे ही भारत के बंटवारे की बात आई, कुछ ही समय के भीतर लोग अपना घर, जमीन, दुकानें, जायदाद, संपत्‍ति, खेती छोडकर हिंदुस्‍तान से पाकिस्‍तान और पाकिस्‍तान से हिंदुस्‍तान की ओर चल पड़े.

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1951 की विस्थापित जनगणना के अनुसार विभाजन के बाद 72,26,000 लाख मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गये और 72,49,000 लाख हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए थे.

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इस विभाजन के दौरान जमकर दंगे-फसाद हुए. एक-दूसरे को भाई समझकर रहने वाले लोग अचानक ही खून के प्‍यासे हो उठे. बर्बरता की तमाम हदें पार कर दी गईं.

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 10 हजार से ज्‍यादा महिलाओं का अपहरण किया गया था. उनके साथ बलात्‍कार हुआ. जबकि सैंकड़ों बच्‍चे अनाथ हो गए, कई मारे गए.

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आजादी का जश्‍न सीमा के इस पार और उस पार के लोगों के लिए कहीं फना हो गया था. इस बंटवारे से जो जख्‍म हुए, वो आज तक लोगों के दिलों में ताजा है.

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