इंडिया टुडे माइंडरॉक्स-2019 के मंच पर सोशल एक्टिविस्ट रिया शर्मा ने शिरकत की. जिसमें उन्होंने बताया कैसे 21 साल की उम्र में 'Make love not scars' के नाम से संस्था शुरू की जो एसिड अटैक सर्वाइवर को हिम्मत देती है, आगे जिंदगी को जीने का नया नजरिया दिखाती है. जानें- इनके बारे में...
रिया शर्मा जन्म 13 अक्टूबर 1992 में दिल्ली में हुआ था. वह 26 साल की हैं. बता दें, रिया शर्मा भारत की पहली ऐसी सोशल एक्टिविस्ट है जिन्हें 2017 में यूनिसेफ ग्लोबल गोल्स अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था.
यहां से की है पढ़ाई
रिया ने की परवरिश नई दिल्ली में हुई है. उन्होंने हरियाणा के Pathways World School से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. जिसके बाद लंदन के Leeds College of Art से ग्रेजुएशन की. जिसके बाद वह वापस भारत लौटीं और 'Make love not scars' की स्थापना कीं.
उनकी संस्था 'Make love not scars' भारत में एसिड अटैक सर्वाइवर्स को फिर से समाज में स्थापित और पहचान देने के लिए काम करता है. उन्होंने दुनिया में एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए दुनिया के पहले पुनर्वास केंद्र की भी स्थापना की थी. इसकी स्थापना साल 2014 में हुई थी.
रिया ने बताया दिल्ली में एक रिहैबिलिटेशन सेंटर है जहां एसिड अटैक सर्वाइवर रहते हैं. जहां पर उनकी देखभाल की जाती है.
रिया ने बताया कि कुछ साल पहले प्यार, इश्क, मोहब्बत में के चक्कर में लोग अपने प्रेमी पर या घरेलू हिंसा की वजह से एसिड अटैक फेंक दिया करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है.
पहले माना जाता कि एसिड अटैक जेंडर वाइस होता था वह केवल लड़कियों पर होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है.
उन्होंने बताया कि मेरे संस्थान में 6 महीने का बच्ची 75 साल की बुजुर्ग महिला यहां तक की एसिड अटैक की शिकार जानवर भी हुए हैं.
(सभी तस्वीरें रिया शर्मा के इंस्टाग्राम अकाउंट ria13sharma से ली गई है)