केरल की एक 22 वर्षीय महिला कनमोनी अपने हौसले से वो सभी बाधाएं पार कर रही है जो कुदरत ने उसे जन्म से दी थीं. कनमोनी का जन्म बिना हाथों और अविकसित पैरों के साथ हुआ था. लेकिन, ये कुदरती कमी भी उसके सपनों के आड़े नहीं आ सकी और उसने पैरों से अपनी कलाकारी के चलते 2019 में सर्वश्रेष्ठ उत्कृष्ट रचनात्मकता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार और 2018 में राज्य पुरस्कार जीतकर अपनी कला का लोहा मनवा दिया.
बिना हाथों के जन्मी कनमोनी ने बचपन से ही अपने पैरों से दोस्ती शुरू कर दी थी. फिर उसको अपने पैरों पर इतना संतुलन आ गया कि एक-एक करके वो अपने सभी सपनों को हासिल करने की दिशा में चल निकली. वह म्यूरल्स बनाने में माहिर है, वो अपने पैरों से पेंटिंग करके सबको चौंका देती है. इसमें उसके परिवार के साथ साथ टीचर्स का भी बड़ा रोल है. एक बार स्कूल में उसकी शिक्षिका ने उसके पैर की उंगलियों के बीच ब्रश फंसाया तो उसने कागज पर बना चित्र जल्दी से रंग डाला. यहीं से उसकी पेंटिंग की यात्रा शुरू हो गई और वो इस कला में माहिर होती गई.
मां ने निभाया बड़ा रोल
कनमोनी की पेंटिग्स इतनी खास है कि कई प्रमुख हस्तियों को उन्हें उपहार में दिया गया है. इनमें से पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, मलयालम सुपरस्टार, ममूटी और मोहनलाल और कई अन्य शामिल हैं. केरल के मंदिर उत्सव कनमोनी की कला के बिना पूरे नहीं होते. हाथी की साजसज्जा कनमोनी का एक और जुनून है. वह आदेश के अनुसार हाथी की साज-सज्जा बनाती है.
कनमोनी मोतियों को क्रम से व्यवस्थित करने के लिए भी अपने पैरों का उपयोग करती है. बचपन से कनमोनी की मां इस बात का विशेष ध्यान रखती थीं कि उनकी बेटी की अक्षमता उसके सामान्य जीवन जीने के बीच में नहीं आनी चाहिए.
पेंटिंग जहां उन्हें खुशी देती है, वहीं संगीत उसकी चिकित्सा है. कनमोनी एक गायिका भी हैं, वो संगीत परीक्षा में भी प्रथम रैंक धारक हैं. वह वर्तमान में तिरुवनंतपुरम में स्वाति तिरुनल कॉलेज ऑफ म्यूजिक में संगीत में एमए कर रही हैं.
टीचर ने पहचानी प्रतिभा
कनमोनी ने aajtak.in से बताया कि मैंने बचपन से ही ड्राइंग और संगीत सीखना शुरू कर दिया था. मेरी मां चाहती थीं कि मैं संगीत सीखूं. मुझे अपनी पहली कक्षा याद नहीं है लेकिन यह मेरी मां का सपना था. बाद में, मैं संगीत में रुचि लेने लगी. मेरी एक टीचर को लगा कि मैं चित्र बना सकती हूं, बस वहीं से मैंने किसी छोटे बच्चे की तरह बिल्लियों-तोतों के साथ शुरुआत की. बाद में मेरी मां मुझे ड्राइंग क्लास के लिए ले गईं.
फिर मैंने विकलांगों के लिए आयोजित प्रतियोगिताओं में जाना शुरू किया. यहां से मेरे पुरस्कार जीतने का सिलसिला शुरू हुआ. मेरी ड्राइंग की विशेषता यह है कि मैं मुख्य रूप से पॉट पर म्यूरल करती हूं, इसके अलावा हाथी सज्जा मुझे पसंद है. मैंने इसे कोविड के दौरान शुरू किया था. मैं वास्तव में उस समय कुछ सीखना और करना चाहती थी. अब लोग इसे घर में सजावट के तौर पर इस्तेमाल करते हैं.
आसान नहीं रहा सफर
कनमोनी कहती हैं कि मैं अपने शरीर की कमियों को अब जीवन में एक प्रेरणा के रूप में देखती हूं. मेरा मानना है कि चाहे आपके पास कितनी अक्षमताएं हों, लेकिन कोई भी सामान्य रूप से जीवन जी सकता है, यह मैंने अपने जीवन से समझा है. मैं इसे पहले अपने लिए और फिर समाज के लिए भी करना चाहती थी. मैं कभी भी इस उम्मीद में कुछ भी शुरू नहीं करती कि यह सफल होगा. मैं बस ये करना पसंद करती हूं. मैं जिंदगी के प्रति सकारात्मक हूं.
(Input- सिबिमोल के जी)
aajtak.in