यूपी 69000 शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा ये सवाल, वकील बोले- बात करके बताएंगे

UP 69000 Teacher Recruitment: उत्तर प्रदेश 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 6800 उम्मीदवारों को भी एडजस्ट करने के लिए कहा है.

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यूपी शिक्षक भर्ती मामले में लंबे समय बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई हुई. (Photo: ITG) यूपी शिक्षक भर्ती मामले में लंबे समय बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई हुई. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:25 PM IST

उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा है कि क्या रिजर्व में रखे गए 6800 अभ्यर्थियों को समायोजित किया जा सकता है? कोर्ट के इस सवाल पर उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कोर्ट के समक्ष कहा कि वो इस मामले में सरकार से सलाह करके सूचित करेंगे. हालांकि, सरकार को इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन प्रक्रिया और अन्य नियम तय करने के लिए सलाह जरूरी है. 

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इस मामले में जस्टिस दीपांकर दत्ता ने तो यह भी कहा कि रिजर्व में रखे गए अभ्यर्थियों की संख्या 6800 से अधिक अभ्यर्थियों की बहाली पर भी सरकार विचार करे. साथ ही कोर्ट ने कहा कि कल को कोई अभ्यर्थी ये कहता हुआ कोर्ट में नहीं आना चाहिए  कि वो मेरिट लिस्ट के तहत आता है लिहाजा उसे भी नियुक्ति का न्याय मिले. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से दस दिनों के भीतर कोर्ट को इस बाबत पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया है. 

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी जिसमें रिजर्व में रखे गए अभ्यर्थियों की बहाली पर रोक लगा दी गई थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जून 2020 और जनवरी 2022 के सलेक्शन लिस्ट को रद्द करते हुए यूपी सरकार का आदेश दिया था कि वो 2019 में हुई (ATRE) सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के आधार पर 69 हजार शिक्षको के लिए सलेक्शन की नई लिस्ट तीन महीने में जारी करें. 

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कई सालों से पेंडिंग है मामला

साल 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार ने 69 हजार सहायक शिक्षक पदों की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था. भर्ती के लिए 6 जनवरी 2019 को परीक्षा का आयोजन किया गया था.इसके बाद 12 मई, 2020 को सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के नतीजे जारी कर दिए थे. लेकिन, भर्ती में आरक्षण से जुड़े नियमों का सही से पालन ना होने के आरोपों के साथ कोर्ट में पहुंचा. 2023 में कोर्ट ने आदेश आया कि 2020 की मेरिट लिस्ट रद्द कर दी जाए. फिर ये मामला सुप्रीम पहुंच गया और वहां लंबित है. 

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