'ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद…', UGC के नए नियमों पर स्टे लगने के बाद क्या बोल रहे JNU स्टूडेंट?

नए नियमों के पीछे UGC का तर्क था कि विश्वविद्यालयों में जाति, जेंडर या दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए इक्विटी कमेटियाँ बनाई जाएं.

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 इस दौरान न तो ABVP और न ही किसी अन्य बड़े छात्र संगठन ने इसमें हिस्सा लिया(Photo:insta/ jnusu_official) इस दौरान न तो ABVP और न ही किसी अन्य बड़े छात्र संगठन ने इसमें हिस्सा लिया(Photo:insta/ jnusu_official)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:34 PM IST

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के कैंपस में यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का जोरदार विरोध हुआ. कोर्ट ने आदेश दिया है कि फिलहाल नया विनियम लागू नहीं होगा और साल 2012 वाले नियम ही प्रभावी रहेंगे. इसी फैसले के खिलाफ साबरमती हॉस्टल के बाहर छात्रों ने प्रदर्शन किया, जहां ब्राह्मणवाद विरोधी नारे लगे और छात्रों ने ब्राह्मणवाद का पुतला भी जलाया.

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ये विरोध प्रदर्शन करीब तीन घंटे तक चला, लेकिन इस दौरान न तो ABVP और न ही किसी अन्य बड़े छात्र संगठन ने इसमें हिस्सा लिया. स्टूडेंट खुद जुटे और बारी-बारी से भाषण देते रहे.

विरोध कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जेएनयूएसयू के संयुक्त सचिव दानिश ने कहा कि ये हक हमें किसी ने खैरात में नहीं दिया, कई साथियों की कुर्बानी के बाद ये अधिकार मिला है. सबसे बड़ा सवाल ये है कि ये रेगुलेशन IIT और IIM में लागू क्यों नहीं किया गया? जब नया नियम आया, तो हमने सोचा था कि इसमें कुछ सुधार किया जा सकता है, लेकिन पिछले दिनों हमने देखा कि इसके खिलाफ कौन-सा तबका खड़ा हुआ. जब मुसलमानों पर हमले होते हैं, तब ये लोग सामने नहीं आते. दानिश ने कहा कि छात्रों को इस मसले पर संगठित होकर आवाज उठानी होगी.

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जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति ने भी सभा को संबोधित किया. उन्होंने शुरुआत में इन नियमों का स्वागत किया और कहा कि ये कदम राधिका वेमुला, फातिमा शेख-जुलैखा (अबिदा तड़वी) और पूरे छात्र समुदाय की लंबी लड़ाई का नतीजा है, लेकिन अदिति ने साफ कहा कि संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है. जब तक रोहित एक्ट लागू नहीं होता, तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी.

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दिल्ली में जेएनयू के अंदर लेफ्ट-झुकाव वाले छात्रों के भाषणों पर प्रतिक्रिया देते हुए ABVP सदस्य प्रिंशु ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने UGC के फैसले पर व्यापक समीक्षा और संभावित कानूनी और नीतिगत कार्रवाई को देखते हुए अस्थायी रोक लगाई है.

यह भी पढ़ें: 'जाति पूछकर रूम देते हैं…', UGC नियमों पर स्टे के बाद स्टूडेंट ने बताई ग्राउंड रियलिटी, Video

प्रिंशु के मुताबिक, कोर्ट के इस आदेश के बाद लेफ्ट इकोसिस्टम पूरी तरह हिल गया, क्योंकि उन्होंने पहले ही इस मुद्दे को समर्थन दे दिया था. उन्होंने प्रदर्शन को 'पूरी तरह शर्मनाक बताते हुए कहा कि इसमें ABVP को गाली दी गई है.

जेएनयू कैंपस में इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन भी हुए.

इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी. ये नए नियम UGC ने इसलिए बनाए थे ताकि उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव को रोका जा सके.

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