'जाम‍िया में नहीं होने देंगे RSS का युवा कुंभ', छात्र संगठनों का विरोध,कैंपस के बाहर पुलिस तैनात

जामिया मिलिया इस्लामिया में आज होने वाले आरएसएस (RSS) के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम को लेकर कैंपस में भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है. छात्रों के कड़े विरोध और संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने कैंपस के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. 

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जामिया मिलिया इस्लामिया में RSS के कार्यक्रम को लेकर हुआ बवाल.  (Photo-@jmiu_official) जामिया मिलिया इस्लामिया में RSS के कार्यक्रम को लेकर हुआ बवाल. (Photo-@jmiu_official)

आशुतोष कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 28 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:53 PM IST

जामिया मिलिया इस्लामिया में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में युवा कुंभ कार्यक्रम का आयोजन किया था जिसे लेकर विवाद गहरा गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कैंपस के भीतर इस कार्यक्रम की अनुमति दिए जाने के बाद छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कैंपस के गेटों और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है.

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क्या है विरोध का मुख्य कारण? 

छात्र संगठन SFI ने इस कार्यक्रम का कड़ा विरोध करते हुए इसे अल्पसंख्यक छात्रों की गरिमा और सुरक्षा पर सीधा प्रहार बताया है. छात्रों का कहना है कि एक ऐसी विचारधारा वाले संगठन का कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर में कराना उकसावे की कार्रवाई है, जो कैंपस के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के खिलाफ है. SFI ने अपने बयान में कहा है कि जामिया जैसे संस्थान में जहां हजारों अल्पसंख्यक छात्र पढ़ते हैं, आरएसएस के शताब्दी समारोह को अनुमति देना सीधे तौर पर छात्रों को भड़काने जैसा लगता है.  

कैंपस की वर्तमान हालात 

कैंपस की स्थिति को देखते हुए गेट और आसपास के मुख्य मार्गों पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी है. प्रदर्शनकारी छात्र प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि कार्यक्रम की अनुमति तुरंत वापस ली जाए. छात्रों ने प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर इस तरह के कार्यक्रम को विश्वविद्यालय में जगह क्यों दी गई.

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दिल्ली यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ विवाद 

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों, खासकर दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर कार्यक्रमों की एक श्रृंखला चल रही है. जामिया के छात्रों का आरोप है कि अन्य संस्थानों के बाद अब जानबूझकर जामिया को निशाना बनाया जा रहा है ताकि वैचारिक विभाजन पैदा किया जा सके.

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