हजारों साल पुराने इतिहास, साम्राज्यों के उत्थान-पतन और सांस्कृतिक बदलावों के बावजूद कुछ भाषाएं ऐसी भी हैं, जिन्होंने समय के साथ अपने आप को और भी ज्यादा निखारा है. ईरान में बोली जाने वाली पर्शियन उन्हीं भाषाओं में गिनी जाती है. इसी बीच एक सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या इस भाषा का संबंध भारत की प्राचीन संस्कृत से है या फिर दोनों की कहानी बिल्कुल अलग है?
क्या पर्शियन भाषा संस्कृत से आई है?
बता दें कि पर्शियन भाषा सीधे संस्कृत से नहीं निकली है. लेकिन
पर्शियन और संस्कृत लैंग्वेज दोनों ही प्राचीन भाषा परिवार से जुड़े हैं. यानी कि यह एक ही परिवार के हैं, लेकिन एक-दूसरे से उत्पन्न नहीं हुई हैं.
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क्या है इन भाषाओं का ओरिजिन?
बता दें कि संस्कृत और पर्शियन दोनों भाषाएं एक ही पूर्वज इंडो-इरानी शाखा से निकलती है जोकि इंडो-यूरोपियन भाषा परिवार का हिस्सा है. संस्कृत (वेदों की भाषा) का विकास भारतीय उपमहाद्वीप में हुआ, जबकि प्राचीन पर्शियन ईरान में विकसित हुई. ये दोनों भाषाएं अपनी ऐतिहासिक जड़ों में काफी समान हैं. संस्कृत भारतीय उपमहाद्वीप में कांस्य युग (Bronze Age) के उत्तरार्ध में विकसित हुई और ऋग्वेद की रचना (1500-1000 ईसा पूर्व) के साथ मुख्यधारा में आई. वहीं, पर्शियन का विकास प्राचीन ईरान (पारस) में हुआ. प्राचीन पर्शियन अचमेनिद साम्राज्य (600-300 ईसा पूर्व) की भाषा थी.
क्यों हैं दोनों के बीच समानता?
दोनों भाषाओं में कई शब्द और व्याकरणिक समानताएं एक-दूसरे से मिलती हैं. जैसे- संख्या, परिवार, प्रकृति से जुड़े शब्द,
ध्वनि और वाक्य संरचना में समानता देखी जाती है. यही, कारण हैं कि दोनों भाषाओं की जड़ एक ही प्राचीन भाषा में है.
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