21 जून का Re-NEET एग्जाम कंप्यूटर बेस्ड हो... सुप्रीम कोर्ट में दूसरी याच‍िका दाख‍िल, CBI से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

NEET पेपर लीक मामला तूल पकड़ता जा रहा है. एक ओर सीबीआई इस पेपर लीक के आरोप‍ियों के यहां छापेमारी कर रही हैं तो वहीं दूसरी सुप्रीम कोर्ट में अब लगातार नीट परीक्षा को सीबीटी मोड में कराने की मांग उठ रही है. यही नहीं एनटीए की जगह ये परीक्षा दूसरी संस्था आयोजितक करे इसकी भी मांग उठ रही है.

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संजय शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 18 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:37 PM IST

नीट (NEET) पेपर लीक के महा-विवाद के बीच अब यह कानूनी जंग सुप्रीम कोर्ट में और तेज हो गई है. परीक्षा में सुधार और पारदर्शिता को लेकर शीर्ष अदालत में एक और नई याचिका दाखिल की गई है. यह अर्जी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, डॉक्टर ध्रुव और हरिशरण देवगन की ओर से दायर की गई है.

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याचिकाकर्ताओं ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के मौजूदा ढर्रे को पूरी तरह बदलने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु और मांगें
21 जून की परीक्षा तुरंत CBT मोड में हो: याचिका में कोर्ट से आग्रह किया गया है कि आगामी 21 जून 2026 को प्रस्तावित NEET-UG पुनर्परीक्षा को मौजूदा 'पेन-एंड-पेपर' (ऑफलाइन) मोड के बजाय तुरंत कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) यानी ऑनलाइन प्रणाली में आयोजित करने का निर्देश दिया जाए.

CBT के लिए समयबद्ध कार्ययोजना: प्रतिवादियों को निर्देश मिले कि वे नीट को पूरी तरह ऑनलाइन (CBT) प्रणाली में बदलने के लिए एक टाइम-बाउंड प्लान कोर्ट के सामने रखें. इसमें साइबर सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों का बुनियादी ढांचा और अभ्यर्थियों की पहुंच का पूरा ब्योरा हो.

NTA को हटाकर नई अथॉरिटी बने: केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि लचर हो चुकी National Testing Agency (NTA) की जगह एक नई स्वतंत्र, पारदर्शी और पेशेवर 'National Examination Authority' का गठन किया जाए, जिसकी वैधानिक जवाबदेही और न्यायिक निगरानी तय हो.

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हाई-लेवल निगरानी समिति का गठन: परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार सुझाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाए. इसमें सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, शिक्षाविद, मनोवैज्ञानिक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, फोरेंसिक वैज्ञानिक और प्रशासनिक विशेषज्ञ शामिल हों.

राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट का पालन: NTA या नई बनने वाली परीक्षा संस्था को पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया जाए.

हाईटेक सुरक्षा और डिजिटल लॉकिंग: सभी राष्ट्रीय परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की 'डिजिटल लॉकिंग' अनिवार्य हो. साथ ही एन्क्रिप्टेड डिजिटल क्वेश्चन पेपर ट्रांसमिशन, बायोमेट्रिक सत्यापन और एआई (AI) आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जाए, ताकि फिजिकल लीक का जोखिम हमेशा के लिए खत्म हो सके.

कोचिंग माफिया पर फास्ट-ट्रैक एक्शन: पेपर लीक और संगठित नकल रैकेट में शामिल बिचौलियों, कोचिंग सेंटरों, रसूखदार व्यक्तियों और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में जांच सुनिश्चित हो.

CBI से मांगी 4 हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट: सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि वह केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश दे कि वह 4 सप्ताह के भीतर NEET-UG 2026 पेपर लीक जांच की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में सौंपे, जिसमें गिरफ्तारियों और आरोपित नेटवर्क की प्रगति का पूरा विवरण हो.

केंद्रवार जारी हो परिणाम: एजेंसी को निर्देश दिया जाए कि NEET-UG 2026 के परिणाम केंद्रवार (Center-wise) प्रकाशित किए जाएं, ताकि परीक्षा में हुई किसी भी तरह की असामान्यता या संदिग्ध स्कोरिंग का पारदर्शी तरीके से पता लगाया जा सके.

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