एनसीईआरटी (NCERT) ने नकली पाठ्यपुस्तकों की छपाई और बिक्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के साथ मिलकर एक अवैध प्रिंटिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया है. इस कार्रवाई में करीब 32 हजार पायरेटेड NCERT किताबें जब्त की गई हैं.
क्राइम ब्रांच ने गुप्त सूचना के आधार पर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के लोनी इलाके के गांव जावली में स्थित एक प्रिंटिंग यूनिट पर छापा मारा. छापे के दौरान अलग-अलग कक्षाओं और विषयों की नकली NCERT किताबें बरामद हुईं. इसके अलावा दो प्रिंटिंग मशीनें, एल्यूमिनियम प्रिंटिंग प्लेट्स, कागज के रोल और स्याही भी जब्त की गई, जिससे बड़े पैमाने पर अवैध छपाई की पुष्टि होती है.
ये कार्रवाई दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज FIR नंबर 336/2025 (दिनांक 11 नवंबर 2025) की जांच के दौरान सामने आए इनपुट्स के आधार पर की गई. मामला भारतीय न्याय संहिता और कॉपीराइट एक्ट, 1957 के तहत दर्ज है. छापेमारी और जब्ती की पूरी प्रक्रिया के दौरान NCERT के प्रकाशन प्रभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने नकली किताबों की पहचान और सत्यापन में तकनीकी सहायता दी.
NCERT ने साफ कहा है कि उसकी किताबों की अनधिकृत छपाई, वितरण या बिक्री कानूनन अपराध है. ऐसे फर्जी पाठ्यपुस्तक न सिर्फ कॉपीराइट का उल्लंघन हैं, बल्कि छात्रों के भविष्य के लिए भी नुकसानदेह हैं क्योंकि इनमें अक्सर गलत या घटिया सामग्री पाई जाती है.
परिषद ने छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही NCERT की किताबें खरीदें और अगर कहीं नकली किताबों की आशंका हो तो NCERT या स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दें.
क्यों होती है पाइरेसी?
हर साल बोर्ड परीक्षाओं और नए सत्र से पहले NCERT किताबों की मांग अचानक बढ़ जाती है. इसी का फायदा उठाकर अवैध प्रिंटर नकली किताबें छापकर बाजार में उतार देते हैं. ये किताबें सस्ती जरूर होती हैं, लेकिन इनमें अक्सर पाठ्यक्रम की गलत जानकारी, छपाई की खराब गुणवत्ता और अधूरी सामग्री पाई जाती है. इससे छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी सीधे प्रभावित होती है.
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