जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी(JNU) जो हमेशा 'इंकलाब' और 'समानता' की बात करता है. आज एक ऐसे फैसले को लेकर विवादों में है, जिसे आलोचक 'विशेषाधिकार की राजनीति' कह रहे हैं. 15 अप्रैल 2026 को जेएनयू की कार्यकारी परिषद (EC) ने एक ऐतिहासिक और विवादित फैसला लिया जिसमें विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के बच्चों के लिए 5% कोटा (वार्ड कोटा) को मंजूरी दी गई.
इस फैसले के साथ ही कैंपस में सुगबुगाहट तेज हो गई है. छात्र और शिक्षक दोनों पूछ रहे हैं कि क्या जेएनयू अपने बेसिक नेचर से पीछे हट रहा है?
जेएनयू में 'वार्ड कोटा' को लेकर बवाल क्यों है?
बता दें कि जेएनयू में पहले से ही ग्रुप 'बी', 'सी' और 'डी' के गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों (नॉन-टीचिंग स्टाफ) के बच्चों के लिए कोटा था. तर्क यह था कि एक गार्ड या माली का बच्चा संसाधनों की कमी के कारण पिछड़ न जाए.
लेकिन नया फैसला 'टीचिंग स्टाफ' यानी प्रोफेसरों के बच्चों को भी इसमें शामिल करता है. जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने 'द हिंदू' को दिए अपने बयान में इस पर कड़ा विरोध जताया है.
अदिति ने कहा कि प्रोफेसरों के बच्चों के पास पहले से ही 'अंग्रेजी' और 'संसाधनों' का विशेषाधिकार है. उन्हें किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है. यह कदम सिर्फ प्रशासन के 'करीबियों' को सेट करने और उनका भविष्य सुरक्षित करने का जरिया है.
शिक्षक संघ (JNUTA) के सचिव अविनाश कुमार ने भी इसे 'मेधा' (मेरिट) पर हमला बताया है. उनका कहना है कि यह उन हजारों छात्रों के साथ अन्याय है जो देश के कोने-कोने से संघर्ष करके यहां पहुंचते हैं.
क्या देश की अन्य यूनिवर्सिटी में भी है ऐसा कोटा? (रिसर्च डेटा)
| विश्वविद्यालय | वार्ड कोटे की स्थिति | ताजा स्थिति (2025-26) |
| दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) | दशकों से लागू | टीचिंग और नॉन-टीचिंग दोनों के लिए कॉलेजों में सीटें आरक्षित हैं |
| बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) | 50% तक कोटा | बीएचयू के स्कूलों (CHS) और कई कोर्स में कर्मचारियों के बच्चों के लिए भारी आरक्षण है. |
| अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) | 'CE' (Child of Employee) कोटा | यहां कर्मचारियों के बच्चों के लिए विशेष सीटें और प्राथमिकता दी जाती है. |
| जामिया मिलिया इस्लामिया | इंटरनल कोटा | यहां भी कर्मचारियों के बच्चों के लिए प्रवेश प्रक्रिया में छूट का प्रावधान है. |
तो जेएनयू पर सवाल क्यों?
दरअसल जेएनयू की पहचान 'इलीटिज्म' (Elitism) के खिलाफ रही है. बाकी यूनिवर्सिटी में इसे 'परंपरा' माना जाता है, लेकिन जेएनयू में इसे विचारधारा का बदलाव माना जा रहा है.
इस कोटे का 'गणित' क्या है?
यह कोटा 'सुपरन्यूमरेरी'होगा. इसका मतलब है कि ये 5% सीटें मौजूदा सीटों के ऊपर होंगी. उदाहरण के लिए अगर किसी कोर्स में 100 सीटें हैं, तो 5 अतिरिक्त सीटें प्रोफेसरों के बच्चों के लिए बना दी जाएंगी. इस पर प्रशासन का तर्क है कि इससे आम छात्रों की सीटों पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन छात्रों का तर्क है कि कैंपस के भीतर मिलने वाली सुविधाओं (हॉस्टल, लैब, लाइब्रेरी) पर तो बोझ बढ़ेगा ही.
आजतक एजुकेशन डेस्क