क्या स्टूडेंट्स का दिमाग कमजोर कर देगा AI? वसंत वैली स्कूल की प्रिंसिपल ने दिया ये जवाब

इंडिया टुडे एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में शिक्षा विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्लासरूम में प्रभाव और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा की. सेशन में वसंत वैली स्कूल की प्रिंसिपल शर्मिला बख्शी, कैंब्रिज स्कूल नोएडा की प्रिंसिपल सुरभि भार्गव और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस के आशीष अरोड़ा ने एआई के सही इस्तेमाल और इसके फायदे-नुकसान पर बात की.

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वसंत वैली स्कूल की प्रिंसिपल शर्मिला बख्शी (फोटो- ITG) वसंत वैली स्कूल की प्रिंसिपल शर्मिला बख्शी (फोटो- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:11 PM IST

India Today Education Conclave 2026: इंडिया टुडे एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में देशभर से शिक्षक और शिक्षा विशेषज्ञ जुटे. इस कॉन्क्लेव में शिक्षा के बदलते ट्रेंड, नई चुनौतियों समेत क्लासरूम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भी विस्तार से बात हुई. स्कूलों में एआई के आने के बाद हो रहे बदलाव पर आयोजित एक सत्र में वसंत वैली स्कूल, दिल्ली की प्रिंसिपल शर्मिला बख्शी, कैंब्रिज स्कूल नोएडा की प्रिंसिपल सुरभि भार्गव और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस एंड असेसमेंट, साउथ एशिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड आशीष अरोड़ा पहुंचे. ये कार्यक्रम सोमवार को नई दिल्ली के ली मेरिडियन होटल में आयोजित हुआ.

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सेशन के दौरान आशीष अरोड़ा ने कहा कि एआई एक शक्तिशाली टेक्नोलॉजी है और यह सबके लिए बराबरी का मौका लेकर आया है. उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल टियर-2 और टियर-3 जैसे शहरों के बच्चों के लिए बड़े काम की चीज साबित हो सकता है जहां के बच्चे अकसर अंग्रेजी के कारण पिछड़ जाते हैं.

शर्मिला बख्शी से जब सवाल पूछा गया कि क्या एआई बच्चों की क्रिटिकल थिंकिंग यानी तार्किक सोच को कमजोर करेगा? उन्होंने जवाब दिया, 'अगर आप एआई का इस्तेमाल गैर-जिम्मेदाराना तरीके से कर रहे हैं, अगर आप एआई से अपना होमवर्क लिखवाकर पेस्ट कर स्कूल में भेज दे रहे तो यह आपकी क्रिटिकल थिंकिंग को कमजोर करेगा.'

उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन अगर आप एआई का इस्तेमाल अपने कॉन्सेप्ट को बेहतर बनाने के लिए करते हैं, अपनी समझ बढ़ाने के लिए करते हैं तो मुझे लगता है कि यह आपकी सोच को विकसित करता है. यह आपको एक बेहतर स्टूडेंट बनाता है.'

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उन्होंने कहा कि हमें अपने आसपास मौजूद सभी अच्छे टूल्स का इस्तेमाल करना चाहिए लेकिन सही तरीके से. अगर आप बिना सोचे समझे किसी भी चीज का इस्तेमाल करेंगे तो वो नुकसानदेह साबित होगा.

प्रिंसिपल बख्शी ने आगे कहा, 'शिक्षकों पर भी ये जिम्मेदारी है कि वो बच्चों को एआई का सही इस्तेमाल सिखाएं.'

प्रिंसिपल सुरभि भार्गव ने सेशन के दौरान कहा कि एआई शिक्षकों की जगह नहीं ले सकता. उन्होंने कहा, 'क्लासरूम की लिखाई-पढ़ाई बहुत अहम है. एआई इन क्लासरूम के लिए मददगार हो सकता है. एआई इसका रिप्लेसमेंट नहीं हो सकता... यह शिक्षकों को साइडलाइन नहीं कर सकता.'

एआई रिस्क है या रिवोल्यूशन और 2030 का क्लासरूम कैसा दिखेगा? इस सवाल के जवाब में वसंत वैली स्कूल की प्रिंसिपल शर्मिला बख्शी ने कहा कि एआई एक रिवोल्यूशन है क्योंकि अब क्लासरूम बदलने वाले हैं.

उन्होंने कहा, 'लेकिन अगर हमने एआई का इस्तेमाल सही ढंग से नहीं किया तो यह रिस्क हो सकता है. 2030 का क्लासरूम बहुत अच्छा होने वाला है जहां छात्र और शिक्षक एक-दूसरे को सिखाएंगे. नॉलेज अब शेयर्ड होगा. 2030 के क्लासरूम की बात करें तो यह बेहद अच्छा दिखेगा...यह एक ऐसी जगह होगी जहां स्टूडेंट्स और टीचर्स साझा सीख लेंगे.'

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