भारत में स्कूबा डाइविंग अब धीरे-धीरे एक उभरता हुआ बिजनेस और करियर ऑप्शन बन रहा है. पहले लोग इसे सिर्फ शौक या छुट्टियों में रोमांच के लिए करते थे, लेकिन अब अलग-अलग उम्र के लोग इसे गंभीरता से अपना रहे हैं. समुद्र के अंदर जाकर पानी के नीचे की दुनिया को देखने का अनुभव लोगों को बहुत आकर्षित कर रहा है. इसी वजह से कई लोग इसे सिर्फ एडवेंचर नहीं, बल्कि एक अच्छा वैकल्पिक करियर भी मानने लगे हैं.
स्कूबा का पूरा नाम सेल्फ-कंटेन्ड अंडरवाटर ब्रीदिंग अपरेटस है. इसकी शुरुआत 1950 के दशक में जैक्स-यवेस कूस्टो ने की थी. तब से यह गतिविधि दुनिया भर में लगातार लोकप्रिय होती गई. भारत में स्कूबा डाइविंग की शुरुआत लगभग 1990 के दशक में हुई थी. शुरुआत में इसकी रफ्तार धीमी रही, लेकिन समय के साथ इसमें बढ़ोतरी हुई है. आज भारत के कई तटीय इलाकों में स्कूबा डाइविंग को न सिर्फ एक रोमांचक अनुभव के तौर पर अपनाया जा रहा है, बल्कि यह पेशेवर रूप में भी आगे बढ़ रहा है. अब लोग इसे सीखकर प्रशिक्षक, डाइव मास्टर या टूर ऑपरेटर जैसे कामों से जुड़ रहे हैं, जिससे यह साफ है कि आने वाले समय में स्कूबा डाइविंग भारत में एक मजबूत करियर और बिजनेस के रूप में उभर सकती है.
भारत में बॉलीवुड और स्कूबा डाइविंग का असर
भारत में स्कूबा डाइविंग को लोकप्रिय बनाने में बॉलीवुड फिल्मों की भी अहम भूमिका रही है. फिल्मों के ज़रिए लोगों को पहली बार समुद्र के अंदर की खूबसूरत दुनिया देखने का मौका मिला.
फिल्म ‘ब्लू’ (2009)
साल 2009 में अक्षय कुमार और लारा दत्ता की फिल्म ‘ब्लू’ रिलीज़ हुई थी. इस फिल्म ने दर्शकों को समुद्र के नीचे की दुनिया से परिचित कराया. हालांकि फिल्म का क्लाइमेक्स डरावना था और उस समय भारत में स्कूबा डाइविंग नई चीज़ थी, इसलिए यह ज़्यादा लोकप्रिय नहीं हो पाई. साथ ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी खास सफल नहीं रही, जिससे स्कूबा डाइविंग को वह पहचान नहीं मिल सकी.
‘ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा’ से बढ़ा क्रेज़
इसके बाद साल 2011 में आई फिल्म ‘ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा’ ने तस्वीर बदल दी. ऋतिक रोशन, फरहान अख्तर, अभय देओल, कैटरीना कैफ और कल्की कोचलिन की इस फिल्म ने यात्रा और रोमांच को बेहद खूबसूरत अंदाज़ में दिखाया. फिल्म की शुरुआत ही स्कूबा डाइविंग सीन से होती है, जिसमें समुद्र के अंदर की रंगीन और शांत दुनिया दिखाई गई है. पानी के भीतर तैरने और उड़ने जैसा एहसास देखकर कई लोग स्कूबा डाइविंग को अपनी बकेट लिस्ट में शामिल करने लगे.
‘द स्काई इज़ पिंक’ ने दिखाया दूसरा पहलू
साल 2019 में आई फिल्म ‘द स्काई इज़ पिंक’, जिसमें प्रियंका चोपड़ा जोन्स और फरहान अख्तर थे, ने वाटर एक्टिविटी का एक अलग रूप दिखाया. फिल्म में यह बताया गया कि अगर कोई स्कूबा डाइविंग नहीं करना चाहता, तो वह स्नोर्कलिंग के जरिए भी समुद्र के नीचे की दुनिया का मजा ले सकता है.
बढ़ता हुआ शौक और पहचान
इन फिल्मों के बाद भारत में स्कूबा डाइविंग को लेकर लोगों का उत्साह बढ़ने लगा. यह एक ऐसा साहसिक खेल है जो रोमांच के साथ मन को शांति भी देता है. धीरे-धीरे लोग समझने लगे कि भारत में भी कई खूबसूरत स्कूबा डाइविंग स्थल मौजूद हैं. आज भारत को स्कूबा डाइविंग के लिए एक छिपे हुए ख़ज़ाने के रूप में देखा जाने लगा है और इस खेल को अपनाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. तो चलिए जानते हैं भारत में स्कूबा डाइविंग के लिए रोजगार के अवसर.
सर्टिफाइड स्कूबा डाइवर बनने के बाद करियर के विकल्प
अगर आप सर्टिफाइड स्कूबा डाइवर बन जाते हैं, तो आपके लिए करियर के कई नए रास्ते खुल जाते हैं। स्कूबा डाइविंग सिर्फ एक शौक नहीं रह जाता, बल्कि यह एक पेशेवर करियर भी बन सकता है। नीचे ऐसे ही कुछ प्रमुख करियर विकल्प बताए गए हैं—
1. स्कूबा डाइविंग प्रशिक्षक (Instructor)
अगर आपको स्कूबा डाइविंग पसंद है और आप दूसरों को सिखाना चाहते हैं, तो यह आपके लिए बेहतरीन विकल्प है. एक स्कूबा प्रशिक्षक का काम अपने छात्रों को ड्राइविंग सिखाना और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखना होता है. यह काम चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन बहुत संतोष देने वाला भी होता है। लोगों को पहली बार पानी के अंदर सांस लेते देखना एक खास अनुभव होता है।
2. सहायक प्रशिक्षक (Assistant Instructor)
सहायक प्रशिक्षक, मुख्य प्रशिक्षक की मदद करता है। जब प्रशिक्षक किसी छात्र को ट्रेनिंग दे रहा होता है, तब सहायक प्रशिक्षक बाकी छात्रों पर नज़र रखता है।
यह पद आमतौर पर उन लोगों के लिए होता है, जो आगे चलकर खुद प्रशिक्षक बनना चाहते हैं।
3. डाइवमास्टर (Dive Master)
डाइवमास्टर पानी के अंदर एक गाइड की तरह काम करता है. जो लोग पहले से प्रमाणित गोताखोर होते हैं और सिर्फ मज़े के लिए डाइविंग करना चाहते हैं, वे डाइव मास्टर की मदद लेते हैं।
डाइवमास्टर का काम होता है—
4. अंडरवाटर फोटोग्राफर
अगर आपको फोटोग्राफी का शौक है, तो आप पानी के अंदर फोटोग्राफर बन सकते हैं. समुद्र के अंदर की दुनिया बेहद खूबसूरत होती है और उसे कैमरे में कैद करना एक अनोखा अनुभव है।
इस काम से आपको समुद्री जीवों को करीब से देखने और समझने का मौका मिलता है.
5. डाइव शॉप मैनेजर
डाइव शॉप मैनेजर का काम पूरे डाइव सेंटर को संभालना होता है. इसमें डाइविंग का शेड्यूल बनाना, ग्राहकों और स्टाफ को संभालना और उपकरणों और सुरक्षा का ध्यान रखना शामिल है.
अक्सर डाइव शॉप मैनेजर बनने के लिए पहले स्कूबा प्रशिक्षक होना फायदेमंद माना जाता है.
6. सार्वजनिक सुरक्षा गोताखोर (Public Safety Diver)
यह काम कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है. इन गोताखोरों को बचाव कार्य, खोज अभियान, पानी के अंदर जांच कार्य के लिए प्रशिक्षित किया जाता है.
इस स्तर तक पहुंचने के लिए पहले एडवांस ओपन वॉटर डाइवर और रेस्क्यू डाइवर बनना जरूरी होता है.
7. अंडरवाटर मॉडल
कुछ स्कूबा डाइवर फ्री डाइविंग भी करते हैं और अंडरवाटर मॉडल बनते हैं. इसमें पानी के अंदर सांस रोककर पोज देना होता है, जो दिखने में आसान लगता है लेकिन काफी मेहनत और अभ्यास मांगता है.
8. समुद्री शोधकर्ता (Marine Researcher)
स्कूबा डाइविंग के जरिए समुद्र और उसके जीवों को करीब से समझा जा सकता है. शौकिया स्कूबा डाइवर को 40 मीटर तक गोता लगाने की अनुमति होती है, जिससे वैज्ञानिक शोध में मदद मिलती है.
9. नाव कप्तान (Boat Captain)
कई डाइव शॉप और रिसॉर्ट ऐसे डाइवर को प्राथमिकता देते हैं, जिनके पास बोट कैप्टन लाइसेंस होता है. क्योंकि दुनिया के ज्यादातर बेहतरीन डाइविंग स्थल तट से दूर समुद्र में होते हैं.
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