अगर कोई आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई कर रहा है तो वो देश के दूसरे आईआईटी में पढ़ाई कर सकेगा. जी हां, सरकार एक ऐसी व्यवस्था पर काम कर रही है, जिसके लागू होने के अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट्स देश के सभी 23 IIT कैंपस में पढ़ाई कर सकेंगे. अगर वे किसी दूसरे IIT में कोई कोर्स करेंगे तो उसके क्रेडिट भी ट्रांसफर हो जाएंगे. ऐसे में जानते हैं कि इस व्यवस्था में किन स्टूडेंट्स को कॉलेज बदलने का मौका दिया जाएगा और उससे जुड़े क्या नियम होंगे...
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल अगस्त में हुई IIT काउंसिल की मीटिंग में यह सुझाव दिया गया था कि करीब 5 फीसदी अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट्स को IIT-से-IIT एक्सचेंज का मौका मिले और क्रेडिट ट्रांसफर आसान बनाया जाए. रिपोर्ट के अनुसार, अभी इस योजना की डिटेल्स तैयार की जा रही है और अलग-अलग आईआईटी से मंजूरी मिलने के बाद सभी संस्थानों से सहमत होकर एक कॉमन डॉक्यूमेंट तैयार किया जाएगा. अभी ये पूरी तरह तय नहीं है कि स्टूडेंट्स को किस आधार पर एडमिशन दिया जाएगा.
कैसे मिलेगा फायदा?
- इस योजना से खास टैलेंट वाले स्टूडेंट्स को फायदा मिल सकता है. जैसे अगर किसी खिलाड़ी को दिल्ली में बेहतर कोचिंग मिलती है तो वह एक-दो सेमेस्टर के लिए IIT दिल्ली जाकर ट्रेनिंग कर सकता है और फिर वापस लौट सकता है. पहले ऐसा मौका नहीं था.
- यह सिस्टम इंटर्नशिप और स्पेशल इलेक्ट्रिव्स के लिए भी मददगार होगा. अभी तक ज्यादातर इंटर्नशिप मई से जुलाई के बीच होती थीं, जो कई स्टूडेंट्स को सीमित लगती थीं. अब पाठ्यक्रम ऐसा बनाया गया है कि छठे सेमेस्टर में सिर्फ चार इलेक्ट्रिव्स हों, जिन्हें स्टूडेंट चाहें तो पहले या बाद में शिफ्ट कर सकते हैं और पूरा सेमेस्टर इंटर्नशिप के लिए खाली रख सकते हैं. अगर ट्रांसफर की सुविधा शुरू हो गई तो वे ये इलेक्ट्रिव्स किसी दूसरे IIT में भी कर सकेंगे.
- इस योजना में कुछ सब्जेक्ट के लिए दूसरे आईआईटी में एडमिशन लिए जा सकेंगे. कुछ IIT में ऐसे खास विषय पढ़ाए जाते हैं जो दूसरे IIT में नहीं होते. ऐसे में जो स्टूडेंट बहुत सोच-समझकर कोर्स चुनते हैं, उनके लिए यह सुविधा फायदेमंद होगी. इससे स्टार्ट-अप जैसे दूसरे काम करने में भी पढ़ाई पर असर नहीं पड़ेगा.
क्या दिक्कत हो सकती है?
एक्सप्रेस की रिपोर्ट में IIT मद्रास के डीन (एकेडमिक कोर्सेज) प्रोफेसर प्रताप हरिदॉस ने बताया कि ये व्यवस्था लागू होने के बाद कुछ दिक्कतें आ सकती हैं, जैसे अगर किसी IIT में आने वाले स्टूडेंट्स ज्यादा हो जाएं तो हॉस्टल की कमी हो सकती है.
NIT, IIT को भी शामिल करने का सुझाव
रिपोर्ट के अनुसार, काउंसिल ने यह भी सुझाव दिया है कि IIT मद्रास की अगुवाई में एक टीम ऐसा फ्रेमवर्क बनाए जिससे IIT के अलावा NIT, IIIT, IISER, NLU जैसे संस्थानों के साथ भी क्रॉस-इंस्टीट्यूशनल पढ़ाई हो सके और इसके लिए गाइडलाइन और टाइमलाइन तय की जाए.
अभी NIT स्टूडेंट्स के लिए एक प्रोग्राम है जिसमें वे अंतिम सेमेस्टर IIT मद्रास में पढ़ सकते हैं और फैकल्टी के साथ काम कर सकते हैं. अगर स्टूडेंट और प्रोफेसर दोनों संतुष्ट हों तो स्टूडेंट सीधे पीएचडी में जा सकता है. इस मॉडल को आगे बढ़ाने पर भी विचार हो सकता है.
aajtak.in