दिल्ली हाई कोर्ट ने कोचिंग संस्थानों के बीच 'क्रेडिट' की जंग और डिजिटल मानहानि पर एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है. अदालत ने लॉ प्रेप ट्यूटोरियल (LPT) को CLAT 2026 की ऑल इंडिया टॉपर (AIR-1) गीताली गुप्ता के नाम, पहचान और तस्वीरों के इस्तेमाल से तत्काल प्रभाव से रोक दिया है. जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने स्पष्ट किया कि छात्रा की पहचान का व्यापारिक लाभ के लिए अनुचित उपयोग नहीं किया जा सकता.
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला टॉप रैंकर्स एडटेक (LegalEdge) और टॉपर छात्रा गीताली गुप्ता द्वारा दायर किया गया था. याचिका के अनुसार, गीताली लीगल एज के 'चैंपियंस बैच' की रेगुलर छात्रा थीं और उन्होंने पूरे साल वहां कोचिंग ली. दूसरी ओर, लॉ प्रेप ट्यूटोरियल के साथ उनका जुड़ाव केवल एक डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम (मॉक टेस्ट) तक सीमित था. आरोप है कि रिजल्ट आने के बाद LPT ने छात्रा को अपनी 'एक्सक्लूसिव' स्टूडेंट बताने के बदले 5 साल की कॉलेज फीस भरने का लालच दिया, जिसे छात्रा ने ठुकरा दिया.
AI और डीपफेक का 'खतरनाक' खेल
अदालत के सामने याचिकाकर्ताओं ने चौंकाने वाले खुलासे किए. वरिष्ठ अधिवक्ता जे. साई दीपक ने दलील दी कि प्रस्ताव ठुकराने के बाद लीगल एज और छात्रा के खिलाफ एक समन्वित ऑनलाइन अभियान चलाया गया. इसमें AI-के जरिए लीगल एज के निदेशकों को जेल के पीछे दिखाने वाले 'डीपफेक' वीडियो प्रसारित किए गए.
मॉर्फ्ड तस्वीरें शेयर की गईं जिसमें छात्रा की तस्वीरों को छेड़छाड़ कर विज्ञापनों में इस्तेमाल किया गया. इसके अलावा यूट्यूब पर CLAT 2026 AIR 1 Geetali Gupta Controversy Exposed जैसे टाइटल के साथ कंटेंट डाला गया.
कोर्ट की टिप्पणी- 'छात्रा को मोहरा बनाया'
रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों को देखने के बाद जस्टिस गेडेला ने माना कि प्रथम दृष्टया यह लीगल एज की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है. अदालत ने छात्रा की स्थिति पर चिंता जताते हुए उसे इस विवाद में एक 'मोहरा' बताया. कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि छात्रा ने सार्वजनिक रूप से अपनी सफलता का श्रेय लीगल एज को दिया है, ऐसे में उसकी पहचान का अनधिकृत उपयोग पूरी तरह गलत है.
अदालत ने केवल कोचिंग संस्थान पर ही रोक नहीं लगाई, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी लपेटे में लिया है गूगल और मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब) को आदेश दिया गया है कि वे चिन्हित मानहानिकारक सामग्री को 72 घंटे के भीतर ब्लॉक करें या हटाएं. प्रतिवादियों को आदेश दिया गया है कि वे इस अभियान से जुड़ा कोई भी आंतरिक रिकॉर्ड या डिजिटल डेटा नष्ट न करें.
साथ ही लीगल एज के खिलाफ किसी भी निंदात्मक सामग्री को साझा करने पर पाबंदी लगा दी गई है. इस मामले में राजस्थान हाई कोर्ट पहले ही जोधपुर में दर्ज कराई गई एक एफआईआर पर स्टे दे चुका है. अब दिल्ली हाई कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष 14 जुलाई 2026 और अदालत के समक्ष 24 अगस्त 2026 को होगी.
संजय शर्मा