अब CBSE स्कूलों में करियर काउंसलर रखना जरूरी, बोर्ड ने इस वजह से लिया फैसला

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और सही दिशा में करियर के मार्गदर्शन देने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने बड़ा फैसला लिया है. बोर्ड ने अपने सभी संबंधित स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य कर दी है.

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छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए CBSE ने बड़ा फैसला लिया है. (Photo: Pexels) छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए CBSE ने बड़ा फैसला लिया है. (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:43 PM IST

बढ़ते पढ़ाई के दबाव और करियर को लेकर कन्फ्यूजन के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने छात्रों के हित में अहम फैसला सुनाया है. बोर्ड ने सभी संबंधित स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलर की नियुक्ति जरूरी कर दी है. राजस्थान हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका के बाद CBSE ने अपने नियमों में बदलाव किया है. इसके तहत अब हर सीबीएसई स्कूल में मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी. 

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यह याचिका, कोटा के वकील सुजीत स्वामी और कुछ मनोविज्ञान विशेषज्ञों की ओर से जुलाई 2025 में दाखिल की थी. इसमें बताया गया था कि पढ़ाई के दबाव की वजह से छात्रों में तनाव बढ़ रहा है और उन्हें सही करियर मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा. 

कोर्ट ने मांगा था जवाब 

बता दें कि सितंबर 2025 में हाईकोर्ट ने इस मामले पर CBSE, राजस्थान बोर्ड, यूजीसी और राज्य सरकार से जवाब मांगा था. सभी की राय लेने के बाद CBSE ने 19 जनवरी, 2026 को नया सर्कुलर जारी किया था. 

क्या है CBSE के नए नियम?

नए नियमों के मुताबिक, अब हर CBSE स्कूल में 500 छात्रों पर कम से कम एक काउंसलर नियुक्त किया जाएगा. इसके साथ ही करियर काउंसलर की नियुक्ति भी जरूरी कर दी गई है. यह नियम पहले  केवल बड़े स्कूलों के लिए था, लेकिन अब छोटे-बड़े सभी स्कूलों पर ये नियम लागू होगा. छोटे स्कूलों की मदद के लिए CBSE ने “हब और स्पोक मॉडल” शुरू किया है, जिसमें बड़े स्कूल आसपास के छोटे स्कूलों को काउंसलिंग की सुविधा देंगे. 

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काउंसलरों की तय की योग्यता 
 
बता दें कि CBSE ने काउंसलरों की योग्यता भी तय कर दी है. मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर के पास मनोविज्ञान या समाज कार्य में डिग्री होनी चाहिए और उन्हें CBSE से मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण लेना होगा. काउंसलर छात्रों और उनके अभिभावकों को सलाह देंगे और मानसिक परेशानी से जूझ रहे छात्रों की मदद करेंगे. 

इन छात्रों के लिए शुरू होगा काउंसलिंग 

करियर काउंसलर कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को सब्जेक्ट चुनने और आगे की पढ़ाई या करियर की योजना बनाने में मार्गदर्शन देंगे. सीबीएसई का यह फैसला छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है. 

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