बोर्ड परीक्षाओं की शुचिता और मूल्यांकन प्रणाली में सुधार की मांग करना क्या अब इस देश में अपराध बन चुका है? सीबीएसई (CBSE) 12वीं के जिस छात्र ने फिजिक्स की आंसर शीट में रोल नंबर की गलत टैगिंग और किसी अन्य छात्र की हैंडराइटिंग अपलोड होने का सनसनीखेज खुलासा किया था, न्याय मिलना तो दूर, अब उस मासूम बच्चे को सोशल मीडिया पर एक सोची-समझी साजिश के तहत प्रताड़ित किया जा रहा है. इस ट्रोलिंग पर पीड़ित छात्र वेदांत के बड़े भाई का दर्द और गहरा गुस्सा एक्स (X) पर फूट पड़ा. उसने ट्रोलर्स को सीधे करारा जवाब देते हुए लिखा:
'मैं वेदांत का भाई हूं और लोग जिस तरह से हमें 'पाकिस्तानी' कह रहे हैं, उसे देखकर मैं पूरी तरह स्तब्ध और आहत हूं. हां, वेदांत का पहले ट्विटर (X) पर कोई अकाउंट नहीं था, क्योंकि वह ट्वीट करने के बजाय अपनी पढ़ाई में व्यस्त रहता था. हमने यह अकाउंट सिर्फ उसकी इस वास्तविक और जायज़ समस्या को उठाने के लिए ही बनाया है, क्योंकि हम रीवैल्यूएशन की इस प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ पा रहे थे.
देश के सबसे बड़े स्कूली बोर्ड यानी CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह सवालों के घेरे में आ चुकी है. इसी कड़ी में सीबीएसई कक्षा 12वीं के एक छात्र ने बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था पर बेहद संगीन और हैरान करने वाले आरोप लगाए हैं. छात्र का दावा है कि री-इवैल्युएशन (पुनर्मूल्यांकन) प्रक्रिया के तहत सीबीएसई ने उसे जो फिजिक्स (भौतिक विज्ञान) की कॉपियां अपलोड करके भेजी हैं, वह उसकी हैं ही नहीं! छात्र, उसके परिवार और शिक्षकों का साफ कहना है कि उत्तर पुस्तिका में किसी और छात्र की हैंडराइटिंग है.
फिजिक्स में हुआ 'बड़ा खेल'?
पीड़ित छात्र ने अपनी आपबीती सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बताया कि सीबीएसई का परिणाम आने के बाद जब उसके फिजिक्स में उम्मीद से बेहद कम नंबर आए, तो उसने पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी के लिए अप्लाई किया. लेकिन आज जब कॉपियां डाउनलोड हुईं, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई.
छात्र ने एक्स (X) पर देश के शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई को टैग करते हुए लिखा कि सीबीएसई द्वारा अपलोड की गई फिजिक्स की आंसर शीट मेरी है ही नहीं. मैं यह बात पक्के तौर पर जानता हूं क्योंकि यह मेरी हैंडराइटिंग नहीं है और इसमें वे सवाल भी नहीं हैं जो मैं हल करके आया था. मेरे परिवार, शिक्षकों और मेरी लिखावट को जानने वाले हर शख्स ने तुरंत यह अंतर पकड़ लिया."
छात्र ने इस धांधली को साबित करने के लिए अपनी अन्य उत्तर पुस्तिकाओं का पूरा एक्स-रे कोर्ट के सामने रखने की बात कही है. छात्र ने आगे लिखा,
'हमने फिजिक्स की कॉपी की तुलना अपनी इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस की आंसर शीट और अपने क्लास नोट्स से की है. इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस की लिखावट आपस में बिल्कुल मैच कर रही है, लेकिन फिजिक्स की कॉपी किसी दूसरे छात्र की लग रही है. लिखावट का स्टाइल, शब्दों का झुकाव, स्पेसिंग, सब कुछ पूरी तरह अलग है. यह कोई मामूली फर्क नहीं है. अगर जरूरत पड़ी, तो मैं सार्वजनिक रूप से तीनों कॉपियां दिखाने को तैयार हूं.'
'छात्र कोई एक्सपेरिमेंट नहीं हैं'-OSM सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सीबीएसई के उस ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) डिजिटल सिस्टम पर उंगलियां उठने लगी हैं, जिसे बोर्ड पारदर्शिता और निष्पक्षता का हवाला देकर प्रमोट करता आया है. छात्र ने बेहद भावुक शब्दों में व्यवस्था की इस लापरवाही पर सवाल दागते हुए लिखा:
'मैंने पूरे साल पढ़ाई की, अपनी नींद, चैन और खुशियों की कुर्बानी दी. और आज मुझे यह भी नहीं पता कि मेरी असली फिजिक्स की कॉपी जांची भी गई है या नहीं? क्या छात्र वाकई यही डिजर्व करते हैं? अगर आंसर शीट ही आपस में बदल रही हैं, तो छात्र इस व्यवस्था पर कैसे भरोसा करें? छात्र कोई एक्सपेरिमेंट नहीं हैं."
देश भर के हजारों छात्र पहले से ही सीबीएसई के ओएसएम सिस्टम में धुंधली स्कैनिंग, फटे हुए पन्ने, अचानक नंबर कम हो जाने और मूल्यांकन की गंभीर विसंगतियों को लेकर शिकायतें दर्ज करा रहे हैं. लेकिन किसी और की कॉपी छात्र के रोल नंबर पर टैग हो जाना प्रशासनिक लापरवाही का सबसे खतरनाक रूप है.
बता दें कि सीबीएसई छात्र की सोशल मीडिया पर इस कंप्लेन में कई ट्रोलर्स उसे ट्रोल करने लगे. पीड़ित छात्र के भाई ने इसका कड़ा विरोध जताया.
छात्र ने शिक्षा मंत्री से की ऑडिट की मांग
फिलहाल भविष्य के अधर में लटकने के बाद पीड़ित छात्र ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सीबीएसई प्रशासन से गुहार लगाई है कि उसकी मूल फिजिकल (हार्ड कॉपी) उत्तर पुस्तिका की तत्काल जांच और सत्यापन किया जाए. साथ ही सीबीएसई के ओएसएम स्कैनिंग और रोल नंबर टैगिंग सिस्टम का तुरंत फॉरेंसिक ऑडिट हो. इस बात की गहराई से जांच हो कि क्या कॉपियों की आपस में अदला-बदली की गई है.
आजतक एजुकेशन डेस्क