पेपरलीक पर 10 साल की सजा, 10 करोड़ जुर्माना... इस राज्य में बन रहा सख्त कानून

असम राज्यसभा में पेपर लीक की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा बिल पेश किया गया है. इस विधेयक के अनुसार, कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को कम से कम पांच साल की कैद होगी, जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है, और कम से कम 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो 10 करोड़ रुपये तक जा सकता है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 10:55 AM IST

केंद्र सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और अनियमितताओं से सख्ती से निपटने के लिए सोमवार, 05 फरवरी 2024 को संसद में एक नया विधेयक पेश किया है. इसी बीच असम सरकार ने भी इसी तरह का एक विधेयक राज्य विधानसभा में पेश किया है. असम सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में अनुचित साधनों में शामिल किसी भी व्यक्ति पर 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव रखा है.

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मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा ने बिल को लेकर कही ये बात

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, राज्य विधानसभा में असम सार्वजनिक परीक्षा विधेयक, 2024 पेश करते हुए, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि प्रस्तावित कानून किसी भी सरकारी अधिकारी को "अच्छे विश्वास" के साथ प्रावधानों को लागू करने के लिए पूर्ण छूट देगा. सीएम ने बताया कि यह सरकार को परीक्षार्थी सहित उस व्यक्ति को दंडित करने का अधिकार देता है, जो किसी उम्मीदवार की सहायता के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रश्नपत्रों को लीक करने, उत्पादन, बेचने, प्रिंट करने या हल करने के किसी भी प्रयास में शामिल हो और बिना नामित परीक्षा आयोजित करे.

कानून का उल्लंघन करने वालों को 5 साल कैद और 10 लाख रुपये जुर्माना

इस कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले लोगों के लिए, चाहे उन्हें परीक्षा आयोजित करने का काम सौंपा गया हो या नहीं, उन्हें कम से कम पांच साल की कैद होगी, जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है, और कम से कम 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो 10 करोड़ रुपये तक जा सकता है. अगर व्यक्ति जुर्माने का भुगतान नहीं कर पाता है तो ऐसी स्थिति में उसे दो साल की अवधि के लिए कारावास की सजा भी दी जाएगी.

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पेपर लीक से जुड़े परीक्षार्थियों को 3 साल की सजा और 1 लाख जुर्माना

परीक्षार्थियों को तीन साल तक की कैद हो सकती है और न्यूनतम 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है और भुगतान में चूक के मामले में सजा को नौ महीने और बढ़ाया जा सकता है. विधेयक में यह भी शामिल है कि सभी अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौता योग्य बनाने और अपराधों की जांच के लिए पुलिस उपाधीक्षक रैंक या उससे ऊपर के एक अधिकारी को यह काम सौंपा जाएगा. सीएम ने विधेयक के उद्देश्य और कारणों को बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य राज्य में किसी भी पद की नौकरी या परीक्षापत्रों को लीक के मामलों पर लगाम लगाना है.

नकदी के बदले नौकरी मामले में राज्य सरकार ने लिया था एक्शन

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल दिसंबर में, असम लोक सेवा आयोग (APSC) में "नकदी के बदले नौकरी" घोटाले में सरकार ने 21 राज्य सिविल, पुलिस और संबद्ध सेवाओं के अधिकारियों को निलंबित कर दिया था. न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी के सरमा समिति की रिपोर्ट में कथित गलत तरीकों से एग्जाम में सेलेक्शन के लिए राज्य सरकार ने 2013 बैच के 34 दागी एपीएससी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की थी.


 

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