देशभर में बोर्ड परीक्षाएं खत्म होते ही छात्रों और अभिभावकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है, कॉपी किसके पास जाएगी, नंबर सही मिलेंगे या नहीं? वर्षों से मूल्यांकन में देरी, मानवीय गलती और पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं. अब शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव दस्तक दे रहा है. कई शिक्षा बोर्ड उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद लेने की तैयारी कर रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में बोर्ड परीक्षाओं की कॉपी जांच पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित हो सकती है, जिससे रिजल्ट प्रक्रिया तेज और अधिक पारदर्शी बनने की उम्मीद है.
क्या है AI आधारित कॉपी जांच प्रणाली?
नई प्रणाली में छात्र की उत्तर पुस्तिका पहले स्कैन कर डिजिटल फॉर्मेट में बदली जाती है. इसके बाद AI सॉफ्टवेयर उत्तरों को पढ़कर उनका विश्लेषण करता है. AI तकनीक मुख्य रूप से तीन स्तर पर काम करती है:
1. हैंडराइटिंग पहचान
AI छात्र की लिखावट को टेक्स्ट में बदल देता है. आधुनिक सिस्टम हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं को समझने में सक्षम हैं.
2. कंटेंट एनालिसिस
सॉफ्टवेयर मॉडल आंसर और तय मार्किंग स्कीम के आधार पर कॉपी में मौजूद मुख्य बिंदु पहचानता है.
सही तथ्य
जरूरी शब्द
स्टेप या फार्मूला
डायग्राम या उदाहरण
इन सबके आधार पर प्रारंभिक अंक सुझाए जाते हैं.
3. स्मार्ट मार्किंग और मॉडरेशन
AI यह भी जांच सकता है कि उत्तर विषय से जुड़ा है या नहीं, केवल लंबाई बढ़ाने के लिए लिखा गया कंटेंट तो नहीं है.
क्या अब शिक्षक की जरूरत खत्म हो जाएगी?
नहीं. शिक्षा विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि AI केवल सहायक की भूमिका निभाएगा. अंतिम अंक देने का अधिकार अभी भी मानव परीक्षक के पास रहेगा. नई व्यवस्था में प्रक्रिया कुछ इस तरह होगी:
कॉपी स्कैन होगी
AI प्रारंभिक मूल्यांकन करेगा
शिक्षक डिजिटल स्क्रीन पर कॉपी देखकर अंक सत्यापित करेंगे
अंतिम रिजल्ट मानव अनुमोदन के बाद जारी होगा
यानी मशीन स्पीड देगी और शिक्षक अंतिम निर्णय.
क्यों जरूरी पड़ा यह बदलाव?
हर साल लाखों उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करना बड़ी चुनौती होती है. पारंपरिक प्रणाली में कई समस्याएं सामने आती रही हैं:
मूल्यांकन में समय लगना
अलग-अलग परीक्षकों की अलग मार्किंग शैली
टोटलिंग या नंबर चढ़ाने में गलती
रीचेकिंग विवाद
AI आधारित सिस्टम इन समस्याओं को कम करने की दिशा में कदम माना जा रहा है.
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
विशेषज्ञों के मुताबिक नई जांच प्रणाली छात्रों की लिखने की शैली भी बदल सकती है. अब ज्यादा महत्व मिलेगा:
पॉइंट्स में उत्तर लिखने को
स्पष्ट हेडिंग और सबहेडिंग
कीवर्ड आधारित जवाब
स्टेप-बाय-स्टेप समाधान
सिर्फ लंबा उत्तर लिखना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सटीक और विषय आधारित उत्तर को प्राथमिकता मिलेगी.
क्या पूरी तरह AI से जांच शुरू हो गई है?
फिलहाल देश के सभी बोर्डों में पूरी तरह AI मूल्यांकन लागू नहीं हुआ है, लेकिन कई बोर्ड डिजिटल मूल्यांकन, ऑन-स्क्रीन मार्किंग और ऑटोमेटेड मॉडरेशन सिस्टम पर काम कर रहे हैं. शिक्षा क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि अगले कुछ वर्षों में AI आधारित मूल्यांकन सामान्य प्रक्रिया बन सकता है. यानी आने वाले समय में बोर्ड परीक्षा की कॉपी सिर्फ शिक्षक ही नहीं, बल्कि AI की निगरानी में भी जांची जाएगी.
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