डेनमार्क में इस सप्ताह दूसरी बार दो प्रमुख हवाई अड्डों के ऊपर संदिग्ध ड्रोन देखे गए. आज देश के उत्तर में वाणिज्यिक और सैन्य उड़ानों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आल्बोर्ग हवाई अड्डे के ऊपर एक ड्रोन मंडराता दिखा. इस वजह से एयरपोर्ट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया.
इससे पहले 22 सितंबर को आसमान में ड्रोन देखे जाने के बाद कोपेनहेगन हवाई अड्डे को कई घंटों के लिए बंद करना पड़ा था. तब डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा था कि इसमें रूसी संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता.
डेनिश एयरपोर्ट के ऊपर दिखे थे ड्रोन
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अब आल्बोर्ग एयरपोर्ट के ऊपर ड्रोन देखे जाने के बाद डेनमार्क के रक्षा मंत्री ट्रॉल्स लुंड पॉल्सन ने साफतौर पर कहा है कि डेनमार्क एक 'हाइब्रिड हमले' का शिकार हुआ है. उन्होंने कहा कि यह हमला व्यवस्थित था, जिसमें एक बड़े इलाके में और सैन्य ठिकानों के पास ड्रोन का इस्तेमाल किया गया. इसलिए इसके पीछे जो भी था वह एक पेशेवर व्यक्तिथा.
वहीं न्याय मंत्री पीटर हम्मेलगार्ड ने इसे हाइब्रिड हमला बताया है. डेनिश अधिकारियों का भी कहना है कि यह किसी प्रोफेशनल का काम है. किसी पेशेवर ने ड्रोन स्थानीय स्तर पर दागे थे. हालांकि, सीधे तौर पर रूस या किसी और को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया.
क्या है हाइब्रिड हमला?
नाटो के अनुसार, हाइब्रिड अटैक एक ऐसी रणनीति है, जिसमें मिलिट्री और नॉन-मिलिट्री दोनों तरह के टूल्स का इस्तेमाल होता है. किसी भी देश को अस्थिर करने के लिए या उस पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए एक साथ साइबर अटैक जैसे असैन्य हमले, ड्रोन अटैक, निजी आर्म्ड फोर्सेस की गतिविधियां, नियमित सेना की तैनाती, देश के अंदर गलत सूचना प्रसारित करना, सामरिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संस्थानों की वेबसाइट हैक करने जैसी हरकतें शुरू हो जाती है.
हाईब्रिड हमले में असैन्य तरीके से अप्रत्यक्ष तौर पर दुश्मन देश के पेशेवर आंतरिक उथल-पुथल जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश करते हैं. हाईब्रिड अटैक में शेयर मार्केट को प्रभावित करना, एयरपोर्ट पर आवाजाही बाधित करना, बैंकों को हैक करना, अनावश्यक रूप से ड्रोन छोड़ देना, महत्वपूर्ण वेबसाइटों को हैक करना या सिक्योर कनेक्शन या सूचनातंत्र में घुसपैठ की कोशिश करना, सुरक्षा प्रणालियों को हैक करना या उसके पासवर्ड क्रैक करने जैसी गतिविधियां शामिल होती है.
हाइब्रिड हमले का मकसद क्या होता है?
हाइब्रिड हमले का लक्ष्य के टारगेट स्टेट या देश में आंतरिक रूप से अस्थिरता या अशांति पैदा करना होता है. इसके लिए तमाम सैनिक और गैरसैनिक रणनीतियों का इस्तेमाल किया जाता है. कई बार हाइब्रिड अटैक गुप्त और सीक्रेट होते हैं, तो वहीं कई बार प्रत्यक्ष तौर पर ऐसे हमले किए जाते हैं. इससे किसी भी देश की आबादी और समाज में संदेह और युद्ध और शांति के बीच उहापोह की स्थिति पैदा हो जाती है.
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