वित्त वर्ष 2026–27 का यूनियन बजट आज सुबह 11 बजे संसद में पेश होने वाला है, और इसी के साथ देश का ध्यान एक बार फिर वित्त मंत्री के बजट भाषण की परंपरा पर केंद्रित हो गया है. आमतौर पर ये भाषण लंबे, विस्तृत और नीतिगत संकेतों से भरे होते हैं, लेकिन भारतीय बजट इतिहास में एक ऐसा अपवाद भी दर्ज है, जो आज तक सबसे अलग दिखाई देता है.एक ऐसा भाषण जो इतना छोटा था कि वह अब भी भारत का सबसे संक्षिप्त बजट भाषण माना जाता है.
यह रिकॉर्ड है जनता पार्टी सरकार के दौरान वित्त मंत्री रहे हिरूभाई एम. पटेल के नाम. उन्होंने 1977–78 का अंतरिम बजट पेश किया था और उसकी स्पीच लगभग 800 शब्दों की थी. स्वतंत्र भारत में अब तक का सबसे छोटा बजट भाषण था.
क्यों देना पड़ा इतना छोटा भाषण
पटेल का यह छोटा भाषण उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों को भी दर्शाता है. 1977 का अंतरिम बजट आम चुनावों के तुरंत बाद पेश हुआ था, जब देश में सत्ता परिवर्तन हुआ था. यह सिर्फ अंतरिम बजट था, इसका उद्देश्य बड़े टैक्स बदलाव या नीतिगत घोषणाएं करना नहीं था. इसलिए पटेल ने भाषण को बेहद सीमित रखा और सिर्फ आर्थिक निरंतरता पर ध्यान दिया.यही वजह थी कि उनकी स्पीच उन लंबे बजट भाषणों से बिल्कुल उलट थी, जो बाद के दशकों में एक सामान्य परंपरा बन गए.
किसके नाम है सबसे लंबी बजट स्पीच
वहीं आधुनिक दौर में बजट भाषण काफी विस्तृत हो चुके हैं. सरकारें इस मंच का इस्तेमाल नीतिगत रोडमैप, सुधार एजेंडा और सेक्टर-वार योजनाएं बताने के लिए करती हैं. उदाहरण के तौर पर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020 में लगभग दो घंटे चालीस मिनट लंबा भाषण दिया था. यहां तक कि 2024 के अंतरिम बजट में भी उनका भाषण एक घंटे से ज्यादा चला.जो पटेल के 800 शब्दों वाले रिकॉर्ड से बहुत आगे था.निर्मला सीतारमण के नाम भारत के इतिहास में सबसे लंबे बजट भाषण का रिकॉर्ड दर्ज है.
हर दौर में बजट भाषण की लंबाई आर्थिक परिस्थितियों, राजनीतिक प्राथमिकताओं और यह पूर्णकालिक बजट है या अंतरिम.इन सब पर निर्भर करती रही है। इसके बावजूद, हिरूभाई एम. पटेल का 1977 का भाषण अपनी सादगी और संक्षेप की वजह से आज भी अद्वितीय है.पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का 2014 का बजट भाषण 2 घंटे 10 मिनट लंबा चला था।
निर्मला सीतारमण से पहले यह रिकॉर्ड बीजेपी नेता जसवंत सिंह के पास था. साल 2003 में उन्होंने लगभग 2 घंटे 15 मिनट की अवधि वाला बजट भाषण दिया था, जिसे उस समय सबसे लंबा संबोधन माना गया था.
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