बोर्ड एग्जाम में पाने हैं अच्छे नंबर...तो इस तरह से लिखें आंसर, इन टिप्स को करें फॉलो 

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं जल्द ही शुरू होने वाली है. इस बार बोर्ड एग्जाम में हिस्सा ले रहे छात्रों के मन में कई तरह के प्रश्न चल रहे हैं. जैसे कि किस तरह का पेपर आएगा या एग्जाम में किस तरह आंसर लिखें कि उन्हें अच्छे नंबर मिलें, तो चलिए जान लेते हैं कि इसे लेकर कुछ टिप्स.

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बोर्ड में इस तरह पा सकते हैं अच्छे नंबर, नोट कर लें टिप्स. (Photo:PTI) बोर्ड में इस तरह पा सकते हैं अच्छे नंबर, नोट कर लें टिप्स. (Photo:PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:15 AM IST

बोर्ड की परीक्षाएं जल्द ही शुरू होने वाली है. परीक्षा की तैयारी में कई छात्र पढ़ाई को बस एक काम समझते हैं, जल्दी से पढ़ो और उत्तर लिख दो. लेकिन सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में केवल आंसर लिखकर आ जाना ही काफी नहीं होता है बल्कि आप किस तरह से अपने आंसर को लिखते हैं, वह भी मायने रखता है. पाठ को ध्यान से समझना, उसके उद्देश्य को पहचानना, लेखक की सोच को समझना और अपने विचार बनाना. जब छात्र इस तरह पढ़ते हैं, तो उनके लिए उत्तर लिखना आसान हो जाता है . 

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जब समझेंगे, तो अच्छे से लिखेंगे 

जब छात्र किसी पाठ को ध्यान से समझकर पढ़ते हैं, तो वे सिर्फ कहानी या जानकारी नहीं समझते बल्कि उसके पीछे छिपा मतलब को भी समझते हैं. वे जान पाते हैं कि लेखक आखिर क्या कहना चाहता है. इस तरह पढ़ने से छात्र सीधे और सटीक उत्तर लिख पाते हैं. वे पहले पॉइंट्स को लिखते हैं. बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों को सटीक आंसर देना चाहिए, उन्हें किसी भी तरह से कहानी लिखने से बचना चाहिए. एनालिस कर पढ़ने से छात्र अपने लंबे उत्तरों को बेहतर ढंग से लिख पाते हैं. वे उत्तर की शुरुआत एक स्पष्ट और सीधी बात से करते हैं, जिससे परीक्षक को तुरंत समझ आ जाए कि छात्र क्या कहना चाहता है. इसके बाद पूछे गए सवालों के बारे में सारी जानकारी बतानी होती है. वे अपने विचारों को पाठ के उदाहरणों से जोड़ते हैं, जिससे उत्तर मजबूत और भरोसेमंद बनते हैं. 

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इस तरह बनाएं आंसर को इफेक्टिव 

उत्तर को इफेक्टिव बनाने के लिए छात्र कुछ लाइनों का यूज कर सकते हैं जैसे कि यह विषय को उजागर करता है…, लेखक यहां संकेत देता है कि…, यह विरोधाभास दिखाता है…, पात्र के कार्य यह दर्शाते हैं कि…, यह घटना कहानी का महत्वपूर्ण मोड़ है क्योंकि… और इस प्रसंग के माध्यम से लेखक जोर देता है कि… लंबे उत्तरों को सही से समझाने और उसमें गहराई लाने के लिए वे ऐसे वाक्य भी लिख सकते हैं जैसे कि गहरे स्तर पर…, इसकी व्याख्या इस प्रकार की जा सकती है…, इसका छिपा हुआ अर्थ यह है कि… और लेखक की तकनीक यह साबित करती है कि. इससे परीक्षक समझ पाता है कि छात्र आखिक क्या कहना चाहता है, जिससे उसे अच्छे नंबर मिल सकते हैं. 

मतलब जानना है जरूरी...

साहित्य में जब छात्र ध्यान से और समझकर पढ़ते हैं, तो वे सिर्फ कहानी नहीं समझते बल्कि उसका असली मतलब भी पकड़ लेते हैं. वे समझ पाते हैं कि कहानी का मुख्य विचार क्या है, पात्र ऐसा क्यों कर रहे हैं और लेखक क्या संदेश देना चाहता है. अगर कोई कहानी अच्छे मानवीय मूल्यों पर है, तो समझकर पढ़ने वाला छात्र यह देखता है कि घटनाएं, संवाद और माहौल मिलकर उस मुख्य विचार को कैसे मजबूत बना रहे हैं. इसी तरह कविता पढ़ते समय अगर छात्र शब्दों की तस्वीर (बिंब), छिपे अर्थ (प्रतीक) और भाव (लहजा) पर ध्यान देते हैं, तो वे सिर्फ पंक्तियों का मतलब नहीं बताते, बल्कि कविता का गहरा संदेश भी समझाते हैं. 

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सोचने- समझने की क्षमता को बढ़ाते हैं...

किताबों में जो पाठ पढ़ाएं जाते हैं, वे सिर्फ कहानी सुनाने के लिए नहीं होते, बल्कि छात्रों को सोचने और समझने के लिए भी बनाए जाते हैं. कई कहानियां नैतिक दुविधाओं (सही-गलत की स्थिति) पर आधारित होती है और कई कविताएं समाज की सच्चाई दिखाती है.  इन्हें ध्यान से और समझकर पढ़ने से सोचने की क्षमता बढ़ती है. जब छात्र पात्रों के फैसलों, कहानी में आए बदलावों या कविता में दिखाए गए विरोधाभासों को समझते हैं, तो वे भाषा के नए तरीके सीखते हैं. वे देख पाते हैं कि लेखक ने अपने विचार कैसे व्यक्त किया है. बाद में वे इन्हीं तरीकों का यूज कर उत्तर लिखते समय कर सकते हैं. ऐसे पढ़ने से शब्दावली मजबूत होती है, वाक्य बनाने की क्षमता बेहतर होती है और अपने विचारों को सही कारणों के साथ समझाने की आदत पड़ती है. 

बेहतर आंसर के लिए पढ़ना जरुरी

आखिर में बोर्ड परीक्षा में अच्छा लिखना तभी संभव है जब पढ़ाई अच्छी हो. जब छात्र समझकर और ध्यान से पढ़ते हैं, तो उनकी समझ और लिखने की क्षमता दोनों बेहतर होती हैं. पढ़ना और लिखना एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. जो छात्र इस आदत को नियमित रूप से अपनाते हैं, वे सिर्फ अच्छे अंक ही नहीं लाते बल्कि  सवाल भी आत्मविश्वास के साथ हल कर पाते हैं. 

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