मणिकर्णिका घाट को लेकर काफी बवाल मचा हुआ है. इसे नए सिरे से बनाने को लेकर तोड़ा जा रहा है.इस पर विपक्ष सरकार पर निशाना साध रही है. मणिकर्णिका घाट बिहार, छत्तीसगढ़ और पूर्वांचल के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण जगह है, जो अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने आते हैं. मणिकर्णिका घाट देश के प्रतिष्ठित स्थलों में से एक माना जाता है. इसलिए मणिकर्णिका श्मशान घाट को आधुनिक बनाने का काम किया जा रहा है. इस काम में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) से भी फंडिंग होगी. ऐसे में सवाल उठता है कि ये सीएसआर क्या है और कैसे इससे मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प के लिए फंडिंग होगी?
क्या होता है सीएसआर
हम अक्सर सीएसआर (CSR) के बारे में सुनते रहते हैं. ये फलां कंपनी का सीएसआर वर्क है. फलां काम सीएसआर के तहत हो रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि सीएसआर होता क्या है? इसे जानने के लिए पहले तो हमें इसका फुलफॉर्म समझना होगा. सीएसआर का पूरा मतलब है - कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सब्लिटी या कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व है. जिस समाज से बड़ी-बड़ी कंपनियां लाभ कमाती है, उसके प्रति उनकी एक जिम्मेदारी होती है, इसे सीएसआर के जरिए ही पूरा किया जाता है.
यूनाइटेड नेशंस इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (UNIDO) के मुताबिक, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी एक मैनेजमेंट कॉन्सेप्ट है, जिसके तहत कंपनियां अपने स्टेकहोल्डर्स से बातचीत कर अपने बिजनेस ऑपरेशन में सामाजिक और पर्यावरणीय चिंताओं को शामिल करती हैं. CSR को आम तौर पर एक ऐसे तरीके के रूप में समझा जाता है जिसके जरिए कोई कंपनी आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक जरूरतों (ट्रिपल-बॉटम-लाइन-अप्रोच) के बीच संतुलन बनाती है. साथ ही, शेयरधारकों और स्टेकहोल्डर्स की उम्मीदों को भी पूरा करना होता है.
सीएसआर से बढ़ती है कंपनी की प्रतिष्ठा
इस लिहाज से CSR, एक स्ट्रेटेजिक बिजनेस मैनेजमेंट कॉन्सेप्ट हो सकता है, या फिर चैरिटी या स्पॉन्सरशिप या फिलॉन्थ्रोपी यानी जरूरतमंदों की मदद करना, इन सब में से कुछ भी हो सकता है. लेकिन, ये सभी चीजें अलग-अलग हैं और इनमें सबसे बाद वाला मतलब फिलॉन्थ्रोपी गरीबी कम करने या गरीबों की मदद के लिए एक जरूरी जरिया है. इससे कंपनी की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर बढ़ सकती है, जो उसके ब्रांड को मजबूत करती है, लेकिन सीएसआर की अवधारणा इससे कहीं अधिक व्यापक है.
छोटे और मध्यम आकार के बिजनेस में CSR को बढ़ावा देने के लिए ऐसे तरीकों की जरूरत है जो इन बिजनेस की जरूरतों और क्षमताओं के हिसाब से हों और उनकी आर्थिक स्थिरता को प्रभावित न करे. UNIDO के मुताबिक अगर CSR प्रोग्राम ट्रिपल बॉटम लाइन (TBL) अप्रोच पर आधारित है, तो उन्हें अपनी कॉम्पिटिटिवनेस से समझौता किए बिना सोशल और एनवायरनमेंटल स्टैंडर्ड्स को पूरा करने में मदद मिलती है.
मुख्य CSR मुद्दे: पर्यावरण प्रबंधन, इको-एफ़िशिएंसी, ज़िम्मेदार सोर्सिंग, स्टेकहोल्डर्स से जुड़ाव, लेबर स्टैंडर्ड और काम करने की स्थितियां, कर्मचारी और सामुदायिक संबंध, सामाजिक समानता, लैंगिक संतुलन, मानवाधिकार, सुशासन, और भ्रष्टाचार विरोधी उपाय. इन मुद्दों पर फोकस सीएसआर किसी भी कंपनी के लिए समाज के प्रति उसके उत्तरदायित्व को पूरा करने में मदद कर सकता है.
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