वो राजा, जिसने खुद को सम्राट घोषित किया और अपनी ताजपोशी में देश का भट्टा बैठा दिया!

सेंट्रल अफ्रीका में एक ऐसा तनाशाह हुआ, जिसने खुद को देश का सम्राट घोषित कर लिया था. उसने अपनी ताजपोशी किसी प्राचीन काल के राजा के तरह की और इसमें उसने इतना ज्यादा खर्चा किया कि देश का पूरा खजाना खाली हो गया था.

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इस तानाशाह की ताजपोशी इतनी भव्य थी कि देश का पूरा खजाना खाली हो गया (Photo - Getty) इस तानाशाह की ताजपोशी इतनी भव्य थी कि देश का पूरा खजाना खाली हो गया (Photo - Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:01 PM IST

अफ्रीका के सबसे क्रूर तानाशाहों में से एक, जिन पर नरभक्षण और अपने विरोधियों को जानवरों को खिलाने का आरोप था. उसने अपनी ताजपोशी में देश का पूरा खजाना ही खाली कर दिया था. इस क्रूर तानाशाह का नाम था -सम्राट बोकासा या जीन-बेदेल बोकासा .जीन-बेदेल बोकासा मध्य अफ्रीकी गणराज्य (CAR) का स्वघोषित सम्राट था.

फ्रांस के समर्थन से, बोकासा 1965 में तख्तापलट करके सत्ता में आया था.  उसने क्रूरता से शासन किया.  उसने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को यातनाएं दीं और उनकी हत्या कर दी. उसके शासनकाल में चोरों के कान काट दिए जाते थे. जिन्हें 1979 में सत्ता से बेदखल कर दिया गया था. उनके 62 बच्चे थे और नेपोलियन के राज्याभिषेक पर आधारित उनके राज्याभिषेक की कीमत उनके देश की पूरी जीडीपी के बराबर थी. क्योंकि, इसमें इतना ज्यादा खर्जा हुआ की पूरा राजकोष खाली हो गया था.  

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बोकासा पर नरभक्षी होने का भी आरोप लगा था
बोकासा पर नरभक्षण के आरोप व्यापक रूप से लगे. ऐसी अफवाहें फैली की बोकासा अपने दुश्मनों का खा जाता है, लेकिन इसकी पुष्टि कभी नहीं हुई.  ये आरोप पेरिस-मैच पत्रिका में छपी उन तस्वीरों से भड़के जिनमें कथित तौर पर एक फ्रिज में स्कूली बच्चों के शव रखे हुए दिखाए गए थे. यह भी दावा किया गया कि उसके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को पकाकर विदेशी मेहमानों को परोसा जाता था या उसके निजी चिड़ियाघर में शेरों और मगरमच्छों को खिला दिया जाता था.

सेंट्रल अफ्रीका का स्वघोषित सम्राट बोकास                                                                                            File Photo - AFP

बोकासा ने 1976 में स्वयं को सम्राट घोषित किया और करोड़ों डॉलर खर्च करके एक भव्य राज्याभिषेक समारोह आयोजित किया. इसमें उन्होंने नेपोलियन की शैली के परिधान पहने और 19वीं सदी के फ्रांसीसी घुड़सवारों की वर्दी पहने सैनिकों से घिरी एक बग्घी में सवार हुए. तीन साल बाद, राजधानी बंगी में प्रदर्शन कर रहे दर्जनों स्कूली बच्चों की उनके अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया गया.

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उन्हें हत्याओं, शवों को छिपाने और गबन के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी. इसके बाद इस सजा को कारावास में बदल दिया गया. उन्हें 1993 में राष्ट्रपति आंद्रे कोलिंगबा द्वारा रिहा कर दिया गया था. बोकासा ने बंगुई स्थित अपने विला में एकांतवास में अपने अंतिम दिन बिताए और 1996 में 75 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई.

75 साल की उम्र में बोकासा की मृत्यु हो गई थी.                                                                                    File Photo - Getty

 उनका कभी आलीशान रहा महल - जिसमें कहा जाता है कि वे सोने और हीरों जड़े हैं. आज खंडहर में तब्दील हो गया है.  उनके दर्जनों बच्चे फटे-पुराने कपड़ों में वहां रहने को मजबूर हैं. बोकासा के जघन्य अपराधों के बावजूद, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक (CAR) ने मरनोपरांत इस तानाशाह को माफ कर दिया. 

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