सिकंदर पोरस को हराने के बाद भारत क्यों नहीं आया? वापस लौटने की ये थी वजह

सिकंदर के विश्वविजयी अभियान का भारत की सीमा पर पहुंचकर अंत हो गया. भारतीय राजा से युद्ध जीतने के बावजूद वह आगे नहीं बढ़ा और भारत को जीतने की मंशा अधूरी रह गई. ऐसे में जानते हैं आखिर सिकंदर के साथ ऐसा क्या हुआ था जो वह भारत आने के बदले वापस लौट गया.

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इस वजह से भारत के अंदर नहीं हो पाई थी सिकंदर की इंट्री (Photo - Pexels) इस वजह से भारत के अंदर नहीं हो पाई थी सिकंदर की इंट्री (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:24 PM IST

सिकंदर महान प्राचीन मैसेडोनियाई शासक और इतिहास के महानतम सैन्य रणनीतिकारों में से एक थे. उन्होंने मैसेडोनिया और फारस के राजा के रूप में प्राचीन विश्व का सबसे बड़ा साम्राज्य स्थापित किया.  हालांकि, सिकंदर महान एक नए साम्राज्य को एकजुट करने के अपने सपने को साकार करने से पहले ही मर गए, लेकिन ग्रीक और एशियाई संस्कृति पर उनका गहरा प्रभाव पड़ा. सिकंदर भारत की सीमा तक पहुंचकर भी अंदर नहीं आए. ऐसा नहीं है कि उनकी सेना भारत की सीमांत राजा से युद्ध हार गई थी. जंग में जीत के बाद भी उन्होंने लौटने का फैसला लिया.

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सिकंदर का व्यक्तित्व समय के साथ अलग-अलग दिखा है- कभी करिश्माई तो कभी निर्दयी, कभी प्रतिभाशाली तो कभी सत्ता के भूखे, कभी कूटनीतिक तो कभी रक्तपिपासु.सिकंदर ने अपने सैनिकों में ऐसी वफादारी पैदा की कि वे उसका कहीं भी अनुसरण करते और जरूरत पड़ने पर अपनी जान भी दे देते थे. वहीं एक समय ऐसा भी आया जब इन वफादार सैनिकों में सिंकदर के खिलाफ विद्रोह की भावना पनपने लगी. 

विश्वविजयी अभियान पर निकला सिकंदर
336 ईसा पूर्व में, सिकंदर के पिता फिलिप की हत्या उनके अंगरक्षक पौसानियास ने कर दी थी. महज 20 वर्ष की आयु में, सिकंदर ने मैसेडोनियाई सिंहासन पर दावा किया और अपने प्रतिद्वंद्वियों को अपनी संप्रभुता को चुनौती देने से पहले ही मार डाला. इसके बाद उन्होंने उत्तरी ग्रीस में स्वतंत्रता के लिए हुए विद्रोहों को भी कुचल दिया. सत्ता संभालने के बाद, अलेक्जेंडर अपने पिता के नक्शेकदम पर चलने और मैसेडोनिया के विश्व प्रभुत्व को जारी रखने के लिए निकल पड़े.सिकंदर ने सेनापति एंटीपेटर को शासक नियुक्त किया और अपनी सेना के साथ फारस की ओर प्रस्थान किया.

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फारस को जीतते हुए सिकंदर की सेना भारत के पास आ पहुंची. 327 ईसा पूर्व में, सिकंदर ने भारत के पंजाब पर आक्रमण किया. तब कुछ जनजातियों ने शांतिपूर्वक आत्मसमर्पण कर दिया और कुछ ने नहीं किया. 326 ईसा पूर्व में, सिकंदर की मुलाकात हाइडेस्पेस नदी (झेलम नदी) पर पौरव के राजा पोरस से हुई.

इस वजह से भारत में नहीं कर सका इंट्री
पोरस की सेना सिकंदर की सेना से कम अनुभवी थी, लेकिन उनके पास एक गुप्त हथियार था—हाथी. सिकंदर की सेना को हाथी वाले सेना से भिड़ना था. भयंकर तूफान में हुई भीषण लड़ाई में पोरस पराजित हो गया. सिकंदर भारत के पूरे भाग पर विजय प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ना चाहता था. तब एक के बाद एक कुछ ऐसी घटनाएं हुईं जिस वजह से सिंकदर ने अपना इरादा बदल लिया. 

हिस्ट्री चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, हाइडेस्पेस में युद्ध के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने सिकंदर को अत्यंत दुखी कर दिया. उसके प्रिय घोड़े, बुसेफालस की मृत्यु हो गई. यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी मृत्यु युद्ध के घावों से हुई या वृद्धावस्था से, लेकिन सिकंदर ने बुसेफालस शहर का नाम अपने घोड़े के नाम पर रखा.

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सिकंदर भारत के अंदर प्रवेश करना चाहता था, लेकिन युद्ध से थके हुए उसके सैनिकों ने इनकार कर दिया और उसके अधिकारियों ने उसे फारस लौटने के लिए मना लिया. इसलिए सिकंदर अपनी सेना के साथ सिंधु नदी के किनारे-किनारे आगे बढ़ा और मल्ली जनजाति के साथ युद्ध में बुरी तरह घायल हो गया.ठीक होने के बाद, उसने अपनी सेना को विभाजित किया, उनमें से आधे को फारस वापस भेज दिया और आधे को सिंधु नदी के पश्चिम में स्थित एक निर्जन क्षेत्र गेद्रोसिया भेज दिया.

सिकंदर की अंतिम लड़ाई साबित हुआ हाइडस्पेस का युद्ध  
बीबीसी के हिस्ट्रीएक्स्ट्रा के मुताबिक, जब सिकंदर भारत में घुसना चाहता था, तब भारत के शक्तिशाली राजा पोरस हाइडेस्पेस नदी के तट पर मैसेडोनियाई सेना से भिड़ गए थे. यह एक बेहद कठिन और भीषण युद्ध था. सिकंदर की सेना ने 200 हाथियों सहित भारतीय सेना से जीत गई, लेकिन हाइडेस्पेस का ये जंग  सिकंदर के पूर्वी अभियान का अंतिम महान युद्ध था. यह सबसे खूनी युद्ध भी माना जाता है, क्योंकि सिकंदर इसे मुश्किल से जीत सका था. इसने मैसेडोनियाई सेना को टूटने की कगार पर पहुंचा दिया था. 

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कहा जाता है कि जीत के बाद सिंकदर की सेना में तीन मील चौड़ी नदी को पार करने का साहस नहीं था. दूसरी ओर भी वैसी ही कठिनाइयों का सामना करने की संभावना को देखते हुए आगे जाने से  सिकंदर की सेना ने इनकार कर दिया. इस तरह सिकंदर के विश्वविजयी बनने की महान साहसिक यात्रा का अंत हो गया.

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