लाखों की ट्रेन‍िंग गई बेकार... अमेर‍िका की आर्मी ने इन सैन‍िकों पर लगाया बैन, जान‍िए क्या है वजह?

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी सेना में ट्रांसजेंडर सैनिकों पर प्रतिबंध के कारण हजारों उच्च प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स जैसे डॉक्टर्स, पायलट्स और वकीलों को उनके पदों से हटाया गया है. इस प्रतिबंध से सेना को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ ऑपरेशनल समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि महत्वपूर्ण पद खाली हो रहे हैं और नई भर्ती नहीं हो पा रही. कई सैनिकों को बिना काम के पेड लीव पर रखा गया है, जिससे सरकार को भारी वित्तीय बोझ उठाना पड़ रहा है.

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अमेर‍िकी सेना में ट्रांसजेडर सैन‍िकों पर बैन (प्रतीकात्मक फोटो) अमेर‍िकी सेना में ट्रांसजेडर सैन‍िकों पर बैन (प्रतीकात्मक फोटो)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 16 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

शिक्षा और करियर के क्षेत्र में कहा जाता है कि 'हुनर' की कोई सीमा या जेंडर नहीं होता, लेकिन अमेरिकी सेना से आ रही खबरें इसके उलट एक कड़वी हकीकत बयां कर रही हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सेना में ट्रांसजेंडर सैनिकों पर लगाए गए प्रतिबंध के कारण हजारों उच्च प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स को उनके पदों से हटा दिया गया है. इनमें डॉक्टर्स, पायलट, वकील और न्यूक्लियर इंजीनियर जैसे पद शामिल हैं.

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लाखों डॉलर की ट्रेनिंग और डिग्री हुई 'बेकार'
इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू आर्थिक नुकसान है. सरकार ने जिन सैनिकों की उच्च शिक्षा और विशेषज्ञता पर करोड़ों रुपये खर्च किए, उन्हें अब सेवा से बाहर किया जा रहा है:

हावर्ड से लॉ की पढ़ाई: कैप्टन रयान गुंडरमैन की कानून की पढ़ाई पर सेना ने 5 लाख डॉलर (करीब 4.2 करोड़ रुपये) खर्च किए. उन्हें 6 साल सेवा देनी थी, लेकिन मात्र 2 साल बाद ही उन्हें 'ट्रांसजेंडर' होने के कारण हटा दिया गया.

पायलट और डॉक्टर्स: रिपोर्ट के मुताबिक, सेना में कम से कम 10 डॉक्टर्स और 8 वकील इस प्रतिबंध की भेंट चढ़ चुके हैं, जबकि उनकी ट्रेनिंग का पूरा खर्च सरकार ने उठाया था.

मिशन पर पड़ रहा है बुरा असर
यह प्रतिबंध स‍िर्फ व्यक्तिगत करियर ही नहीं, बल्कि सैन्य ऑपरेशन्स के लिए भी खतरा बन रहा है. विमान वाहक पोत USS अब्राहम लिंकन को एक महत्वपूर्ण न्यूक्लियर रिएक्टर सुपरवाइजर के बिना ही युद्ध क्षेत्र में तैनात होना पड़ा, क्योंकि उन्हें ट्रांसजेंडर होने के कारण छुट्टी पर भेज दिया गया था.

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सेना के कई यूनिट्स में पदों की कमी हो गई है क्योंकि प्रतिबंध के शिकार सैनिक अभी भी कागजों (Books) पर मौजूद हैं, जिससे उनकी जगह नई भर्ती नहीं हो पा रही है.

'घर बैठने' के लिए मिल रही है सैलरी
सबसे अजीबोगरीब स्थिति यह है कि कई सैनिकों को महीनों से 'पेड लीव' पर रखा गया है. यानी सरकार उन्हें काम न करने के लिए मोटी तनख्वाह दे रही है. ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर की एक पायलट ने बताया कि उन्हें एक साल तक घर बैठने के लिए करीब 2.5 करोड़ रुपये दिए गए, जो टैक्सपेयर्स के पैसे की भारी बर्बादी है.

प्रशासन का कड़ा रुख
राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस फैसले को सही ठहराया है. रक्षा मंत्री ने इसे कट्टरपंथी विचारधारा करार देते हुए कहा है कि सेना में स‍िर्फ कठोर मानकों का पालन करने वालों की जगह है. हालांकि, विशेषज्ञों की एक स्टडी में पाया गया है कि ट्रांसजेंडर सैनिकों से सैन्य ऑपरेशन्स में कोई बाधा नहीं आती.

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