सोनीपत के पास तेवड़ी गांव के रहने वाले प्रदीप सिंह मलिक ने यूपीएससी की परीक्षा में पूरे देश में पहली रैंक हासिल की है. एक साधारण किसान परिवार में जन्मे प्रदीप के लिए ये सफर आसान नहीं था. एक तरफ नौकरी करके घर चलाने की गरज थी तो दूसरी ओर आईएएस बनकर ख्वाब पूरा करने की उम्मीद. नौकरी के साथ कोचिंग कर पाना उनके लिए मुश्किल था क्योंकि नौकरी वो छोड़ नहीं सकते थे.
आजतक से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में प्रदीप ने बताया कि किस तरह उन्होंने चुनौतियों का सामना करके ये मुकाम हासिल किया है. प्रदीप ने बताया कि उन्होंने 12वीं के बाद कंप्यूटर साइंस में मुरुथल यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की. उसके बाद कस्टम में बतौर इंस्पेक्टर ज्वॉइन किया और पढ़ाई को जारी रखा. उन्होंने चार साल कस्टम डिपार्टमेंट में नौकरी की.
मेरे दादा जी भी चाहते थे कि मैं आइएएस बनूं. लेकिन मेरे लिए एक बड़ी चुनौती थी कि मैं जॉब छोड़कर तैयारी नहीं कर सकता था. घर की आर्थिक स्थितियां इतनी अच्छी नहीं थी. ऐसे में मेरे सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि कैसे मैं जॉब के साथ तैयारी करूं.
उन्होंने कहा कि आजकल यूपीएससी का ट्रेंड बदल चुका है. उन्होंने कहा कि अब यूपीएससी में भी करंट सवाल पूछे जाते हैं. अब अपने आसपास की चीजों से अवेयर रहकर उन पर अपने विचार बनाएं, उसी से सवाल पूछे जाते हैं. इसके लिए मेरी स्मार्ट स्टडी ने मदद की.
प्रदीप ने बताया कि उन्होंने चौथी बार यूपीएससी का एग्जाम दिया है. जिसमें से दो बार वो मेन्स एग्जाम क्लियर नहीं कर पाए थे. साल 2018 में प्रदीप ने यूपीएससी में 260 रैंक हासिल की और आईआरएस में ज्वॉइन किया.
प्रदीप ने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत और परिजनों को दिया है. प्रदीप खुद एक किसान परिवार से हैं और एक अधिकारी के तौर पर किसानों और गरीब तबके के लिए काम करना चाहते है. प्रदीप ने कहा एक अधिकरी के तौर पर काफी चुनौती आएंगी लेकिन वो मेहनत से सबसे निपटेंगे.
आईएएस टॉपर प्रदीप का पूरा इंटरव्यू यहां सुनें-
पवन राठी