भारत के सबसे बड़े रिटेल ब्रोकरेज कंपनी जेरोधा के को-फाउंडर निखिल कामथ की सफलता की कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा है. जहां एक ओर दुनिया मानती है कि सफलता केवल अच्छी डिग्री होने से आती है वहीं, निखिल ने 10वीं में पढ़ाई छोड़ सफलता की एक नई डेफिनेशन लिखी है. उन्होंने ये साबित कर दिया है कि जीवन में जब तक रिस्क नहीं लेते हैं कामयाबी नहीं मिल सकती है. 1986 में कर्नाटक के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे निखिल कामथ का मन कभी भी किताबों और क्लासवर्क में नहीं लगा. उन्हें स्कूल से नफरत थी. इस जर्नी में उनके माता-पिता ने भी उनका साथ दिया. इसके बाद 8000 की नौकरी से 23000 करोड़ का बड़ा साम्राज्य खड़ा कर दिया.
14 साल की उम्र में पहला काम
बता दें कि निखिल कामथ ने 14 साल की उम्र में पहली बार एंटरप्रेन्योरशिप की शुरुआत मात्र 14 साल की उम्र में की थी. जब वह क्लास 9 में थे तो, उन्होंने अपने दोस्त के साथ मिलकर पुराने मोबाइल फोन खरीदने और बेचने का काम शुरू किया था. उनका वह काम बहुत अच्छा चल रहा था लेकिन उनकी मां के इसके बारे में मालूम चला तो, उन्होंने सारे फोन फेंक दिए लेकिन इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी.
8000 रुपये की पहली नौकरी
निखिल कामथ ने एक पॉडकास्ट में बताया था कि 2000 के दशक की शुरुआत में बेंगलुरु के एक कॉल सेंटर में अपनी पहली नौकरी की. उस समय उन्हें सालाना करीब 88,000 रुपये मिलते थे यानी की हर महीने 7 से 8 हजार रुपये. निखिल बताते हैं कि उनके माता-पिता के कुछ ऐसे नियम थे जिनका पालन करना आज के समय में बहुत कठिन है. उन्होंने बताया कि उनके घर में प्रयास और प्रयोग दोनों करने की आजादी थी. लेकिन जब निखिल ने 15 से 16 साल की उम्र में स्कूल छोड़ने का फैसला किया तो, उनके माता-पिता ने उनका साथ दिया. 10वीं का पढ़ाई छोड़ने के बाद उन्होंने कॉल सेंटर में नाइट शिफ्ट में काम करना शुरू किया और खाली समय में स्टॉक ट्रेडिंग खीखते थे. उनके माता-पिता ने कभी डिग्री को सफलता को ही एकमात्र पैमाना नहीं माना.
शुरू की खुद की कंपनी
बता दें कि निखिल ने अपने भाई नितिन के साथ मिलकर साल 2010 में जेरोधा की शुरुआत की. उन्होंने डिस्काउंट ब्रोकरेज मॉडल लॉन्ट किया, जिससे आम लोगों के लिए शेयर बाजार में निवेश करना आसान और सस्ता हो गया. फोर्ब्स के मुताबिक, निखिल कामथ की नेटवर्थ 2.5 अरब डॉलर (करीब 23 हजार करोड़ रुपये) है.
आजतक एजुकेशन डेस्क