AI ने छीनी इंजीनियर की नौकरी, गुजारे के लिए करना पड़ा वेटर का काम

इस समय बड़ी टेक कंपनियां अपने मुश्किल दौर से गुजर रही हैं. कर्मचारियों पर छंटनी का खतरा मंडरा रहा है. इस बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर एक पोस्ट वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि 18 साल के एक अनुभवी सॉफ्टवेयर इंजीनियर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से नौकरी से निकाल दिया गया था और अब वह मैकडॉनल्ड्स में काम कर रहा है. 

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software engineer 18 years experience laid off story.  (Photo-ITG) software engineer 18 years experience laid off story. (Photo-ITG)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 03 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:47 PM IST

एआई की वजह से हो रही बड़ी टेक कंपनियों में छंटनी को लेकर एक और घटना सामने आई है. लेकिन उसके पहले सोचिए कि आपने अपनी जिंदगी के 18 साल जिस स्किल को निखारने में लगा दिए, जिसे अपना जुनून बनाया वो एक झटके में किसी मशीनी दिमाग के आगे छोटा पड़ जाए. यह घटना ऐसे ही एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की है, जिसके पास लगभग दो दशकों का अनुभव था, लेकिन वक्त की मार और AI के बढ़ते ट्रेंड ने उसे कीबोर्ड छोड़कर मैकडॉनल्ड्स के काउंटर पर खड़ा कर दिया. 

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सोशल मीडिया पर वायरल हुई घटना 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर एक एक यूजर का पोस्ट वायरल हो गया है, जिसमें वह दावा कर रहा है कि करीब 18 साल के अनुभव वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को कंपनी ने एआई के कारण नौकरी से निकाल दिया. अब वह अपना किराया चुकाने के लिए वह मैकडॉनल्ड्स में काम कर रहा है. यह पोस्ट रेडिट के r/ClaudeAI ने पोस्ट किया है. 

एआई ने ली टीम की जगह 

यूजर ने लिखा कि उन्होंने 18 साल तक सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम किया, लेकिन आठ महीने पहले उनकी नौकरी चली गई. उनके मुताबिक, कंपनी ने 12 इंजीनियरों की टीम को हटाकर सिर्फ दो एआई एक्सपर्ट्स रख लिए. तब से उन्होंने 100 से ज्यादा नौकरियों के लिए आवेदन किया, लेकिन अब तक उन्हें नई नौकरी नहीं मिल पाई है. फिलहाल गुजारा करने और किराया भरने के लिए वह मैकडॉनल्ड्स में काम कर रहे हैं. 

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खराब इंटरव्यू को लेकर कही ये बात 

उन्होंने अपने इंटरव्यू के खराब अनुभव भी साझा किया. उनका कहना है कि हायरिंग मैनेजर अक्सर उनसे पूछते हैं कि वे किसी नए या अनजान कोडबेस को कैसे समझेंगे, लेकिन उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं होते. उन्होंने यह भी बताया कि एक एचआर इंटरव्यू में तो उनसे साफ कहा गया कि डेवलपर अब पुराने जमाने की बात हो गए हैं और कंप्यूटर साइंस की डिग्री की अब उतनी अहमियत नहीं रही. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कई अनुभवी इंजीनियर भी इसी समस्या का सामना कर रहे हैं. उन्होंने लिखा कि मैं 200 से अधिक ऐसे डेवलपर्स को जानता हूं जो ऐसी ही स्थिति में हैं और बताया कि कुछ ने अलग ही नौकरियां ले ली हैं जबकि अन्य ने नौकरी की तलाश पूरी तरह से बंद कर दी है. 

छोटी टीमों के साथ काम हो रहा बंद 

पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा कि अब कंपनियां एआई टूल्स की मदद से छोटी टीमों के साथ काम करना पसंद कर रही हैं. कुछ लोग जो एआई को सही तरह से निर्देश दे सकते हैं, वही काम कर रहे हैं जिसके लिए पहले बड़ी इंजीनियरिंग टीम की जरूरत होती. ऐसे फैसले लेने वाले अधिकारी खुद इन छंटनी के असर को महसूस नहीं करते बल्कि इसका बोझ कर्मचारियों को उठाना पड़ता है. 

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फिर छिड़ी नई बहस 

कई लोगों ने इंजीनियर की बात से सहमति जताई और कहा कि अब कंपनियां कर्मचारियों से एआई टूल्स के जरिए ज्यादा काम करवाना चाहती हैं. वहीं, कुछ लोगों का मानना था कि जो डेवलपर्स एआई सीख लेते हैं, उनकी मांग अभी भी बनी हुई है. एक यूजर ने कहा कि अब अच्छे डेवलपर्स के पास एआई की वजह से सहायकों की पूरी टीम जैसी मदद है. दूसरे ने लिखा कि जो लोग इंटरव्यू में एआई के इस्तेमाल को सही से समझा नहीं पाते, वे पीछे रह जाते हैं. कुछ लोग इस घटना को लेकर शक में भी थे और सोच रहे थे कि क्या 18 साल का अनुभव रखने वाला इंजीनियर इतनी जल्दी मजबूरी में फास्ट-फूड की नौकरी करने लगेगा. 

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