पश्चिम बंगाल की सियासत में 'मेदिनीपुर के लाडले' शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके ही घर में 15,105 वोटों से मात देकर इतिहास रच दिया है. अब घोषणा हो चुकी है कि 'दादा' ही बंगाल के अगले मुख्यमंत्री होंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि राजनीति के दांव-पेच में माहिर शुभेंदु पढ़ाई के मामले में भी काफी सधे हुए हैं और उन्होंने नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी से अपनी मास्टर डिग्री हासिल की है.
स्कूल से मास्टर्स तक...
शुभेंदु अधिकारी का शुरुआती जीवन पूर्व मेदिनीपुर में बीता और उनकी शिक्षा काफी व्यवस्थित रही है. हायर सेकेंडरी यानी 12वीं तक की पढ़ाई उन्होंने 1987 में कांथी मॉडल स्कूल से अपनी 12वीं की परीक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने कांथी पी.के. कॉलेज (विद्यासागर यूनिवर्सिटी) से स्नातक की डिग्री ली. अपनी उच्च शिक्षा को जारी रखते हुए उन्होंने नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी (NSOU) से एम.ए. (M.A.) की पढ़ाई पूरी की. राजनीति की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने पढ़ाई से अपना नाता कभी नहीं तोड़ा.
भवानीपुर में दीदी का किला ढहाया
कल के ऐतिहासिक नतीजों में शुभेंदु ने भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को हराकर साबित कर दिया कि नंदीग्राम की जीत कोई तुक्का नहीं थी. इस बड़ी जीत के बाद बीजेपी में उन्हें CM पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है. फिलहाल, पूरी पार्टी उनकी इस ऐतिहासिक जीत को सेलिब्रेट कर रही है.
सियासी सफर: कांग्रेस से बीजेपी तक
शुभेंदु का राजनीति से नाता पैदाइशी है. उनके पिता शिशिर अधिकारी तीन बार के सांसद और यूपीए-2 सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं.
शुरुआत: उन्होंने 1995 में कांग्रेस के साथ पार्षद के तौर पर करियर शुरू किया. 1998 में जब ममता ने टीएमसी बनाई, तो अधिकारी परिवार उनके साथ हो गया.
नंदीग्राम आंदोलन के नायक: 2007 का वो दौर कौन भूल सकता है? शुभेंदु ही वो नेता थे जिन्होंने नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन की कमान संभाली जिसने 2011 में 34 साल पुरानी वामपंथी सरकार को उखाड़ फेंका.
पावरफुल मंत्री से बागी तक: टीएमसी में वे दूसरे सबसे ताकतवर नेता माने जाते थे. परिवहन और सिंचाई जैसे बड़े मंत्रालय संभाले, लेकिन अभिषेक बनर्जी का कद बढ़ने के साथ ही उनकी दूरियां बढ़ती गईं. नवंबर 2020 में इस्तीफा दिया और दिसंबर 2020 में बीजेपी का दामन थाम लिया.
आजतक एजुकेशन डेस्क