मोदी की 'पाठशाला': परेशान छात्र, PM की पेरेंट्स को सलाह- इच्छाओं के भूत न पालें

पहली बार 'परीक्षा पर चर्चा' कार्यक्रम के जरिए छात्रों से सीधा संवाद कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चों के पेरेंट्स की जमकर क्लास ली. जानें पीएम मोदी ने पेरेंट्स को क्या सलाह दी?

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'परीक्षा पर चर्चा' में बच्चों से बात करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'परीक्षा पर चर्चा' में बच्चों से बात करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रियंका शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 9:12 AM IST

पहली बार 'परीक्षा पर चर्चा' कार्यक्रम के जरिए छात्रों से सीधा संवाद कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चों के पेरेंट्स की जमकर क्लास ली. दरअसल, देशभर के छात्रों ने पेरेंट्स की अपेक्षाओं को लेकर छात्रों ने जिस तरह से सवाल किए उससे लगा कि वो इनसे परेशान हैं. छात्रों ने पूछा- हर माता-पिता डॉक्टर या इंजीनियर ही बनाना चाहते हैं. हमारे रुचि किस चीज में है इसके बारे में नहीं सोचते. क्या ये सही है?  जिसपर मोदी ने कहा कि 'लगता है मुझे आज पेरेंट्स की क्लास लगानी पड़ेगी'.

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दिल्ली में 'मेकिंग एग्जाम फन: चैट विद पीएम मोदी' में प्रधानमंत्री ने कहा, सवाल स्टूडेंट भर का नहीं है. मां-बाप भी कुछ इसी तरह के सवाल कर रहे हैं कि बच्चों को समझाओं. उनकी मानसिकता सही नहीं है. मोदी ने कहा- माता-पिता पर शक करना बंद करें. वो आपके लिए अपनी जिंदगी खपा देते हैं. स्वीकार कर चलाना चाहिए कि पेरेंट्स का सपना होता है अपने बच्चे को कुछ बनते देखने का. उनकी निष्ठा पर शक न करें. भरोसा होने पर आपसी समझ का रास्ता खुल ही जाता है.

छात्रों को सलाह देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, माता-पिता को देखकर पढ़ाई न करें. तनावपूर्ण वातावरण तबाही कर देता है. कई पिताओं के साथ ऐसा होता है कि वो अपने सपने, बच्चों में ट्रांसप्लांट करना चाहते हैं. मां-बाप कभी-कभी अपने बच्चों की क्षमता और परवरिश देखे बिना उनमें खुद के अधूरे सपने पूरा होने की इच्छा पाल लेते हैं. मोदी ने इसे इच्छाओं का भूत करार दिया. कहा- वो भूत आपको जकड़ लेते हैं. इससे बचने के लिए जब पिता अच्छे मूड में हो, तो उनसे खुलकर बात करनी चाहिए. मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा, भारत का बच्चा जन्मजात नेता होता है. बच्चे अपनी जरूरत के लिए अपना काम निकाल लेते हैं. उन्हें मालूम है कि मां, दादी, भाई या बहन किसके जरिए काम निकालना है. बहन ने एक बार मन बना लिया तो पापा की ताकत नहीं है कि वो मना कर दें. यही बात होती है हमारे परिवारों में.

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अभिभावकों को सलाह

मोदी ने कहा, मैं अभिभावकों से कहूंगा इसको जो सोशल स्टेट्स बना दिया है कि मेरा बेटा ये करेगा वो करेगा, दूसरों ने किया और मेरे ने नहीं किया तो मैं मुंह दिखाने लायक नहीं रहा-  इसे बंद कर दीजिए. मोदी ने कहा, समाज में पिता किसी और बच्चे की कथा सुनकर घर आते हैं और मन में सोचते हैं कि मेरे बच्चे बेकार हैं. पत्नी को डांटते हैं - तूने बच्चों को क्या सिखाया. घर पहुंचाते ही आप मिल गए सामने तो खेल ख़त्म.

सोशल स्टेटस न बनाएं

मोदी ने कहा, मैं अभिभावकों से कहता हूं कि आप इन चीजों को सोशल स्टेट्स न बनाएं. आपके बेटे के अंदर जो सामर्थ्य है उसी की चर्चा कीजिए. दूसरों के सामर्थ्य से उसे न देखें. हर बच्चे में कुछ ख़ास होता है. उस पर उधार चीजें न थोपे. बच्चों पर दबाव न डालें. अंक जिंदगी नहीं होती. क्या एक परीक्षा ही जिंदगी है? आप कलाम को देख लीजिए. वो फाइटर प्लेन के पायलट बनना चाहते थे. फेल हो गए. क्या वो फेल हो गए? नहीं आगे देश को एक महान वैज्ञानिक मिला.

मोदी ने कहा, इसलिए दूसरों के बच्चे देखकर अपने बच्चों से मूल्यांकन और अपेक्षा नहीं करना चाहिए. बच्चों से बातचीत करना चाहिए. परिवार में एक खुलापन और तंदरुस्त वातावरण रहना चाहिए. हमारे यहां शास्त्रों में भी है कि 18 साल का बेटा-बेटी हो जाए तो उन्हें मित्र मानना चाहिए.

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बता दें कि दिल्ली के तालकटोर स्टेडियम में देशभर के करीब 10 करोड़ छात्र-अध्यापकों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जोड़ा गया. कार्यक्रम के दौरान मोदी ने परीक्षा को लेकर बच्चों को उनके सवालों के जवाब और कई टिप्स दिए.

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