कई भारतीय युवाओं का सपना होता है कि वे किसी बड़ी और वैश्विक टेक कंपनी में काम करें. लेकिन कर्मचारियों की रेटिंग बताती है कि इन कंपनियों में काम करने का अनुभव हमेशा उम्मीदों जैसा नहीं होता. इनकी सैलरी हमेशा ही चर्चा का विषय रहती है. ब्लाइंड सर्वे के अनुसार, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी बड़ी कंपनियां भारत में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली कंपनियों में तो शामिल हैं, लेकिन वे 2026 की टॉप 15 हाई रेटिंग वाली कंपनियों में जगह नहीं बना सकीं.
25 फरवरी को जारी इस रिपोर्ट में भारत की सबसे हाई और लो रेटिंग वाली कंपनियां, सबसे ज्यादा डिमांड वाली कंपनियों, सर्च ट्रेंड्स और सबसे अधिक सैलरी वेतन देने वाली कंपनियों की जानकारी दी गई है.
इन कंपनियों का नाम है शामिल
2026 में भारत की टॉप रेटेड कंपनियों में एनवीडिया, गूगल, एप्पल, अकामाई टेक्नोलॉजीज, वीएमवेयर, एडोब, टारगेट, क्रेड, नोकिया, थॉटवर्क्स, एयरबीएनबी, लोवेज, ऑटोडेस्क, जोहो और सर्विसनाउ शामिल हैं. इनमें एडोब, क्रेड, नोकिया, थॉटवर्क्स, एयरबीएनबी, लोवेज और ऑटोडेस्क इस साल नई एंट्री करने वाली कंपनियां हैं. वहीं, सबसे कम रेटिंग पाने वाली कंपनियों में डीपी वर्ल्ड, पेटीएम, टेकिओन कॉर्प, जेटा और स्प्रिंकलर शामिल हैं. इसके अलावा ओला, ग्रुपन, ओयो, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, एचसीएल एंटरप्राइज, डिलीवरू, कंपास, रिपलिंग, इंफोसिस और कैशफ्री जैसी कंपनियों के नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं.
रिपोर्ट में इन बातों का जिक्र
यह रिपोर्ट ब्लाइंड ऐप पर 40 हजार से ज्यादा कर्मचारियों की राय के बेसिस पर तैयार किया गया है. कर्मचारियों ने अपनी कंपनी को संतुष्टि, करियर ग्रोथ, वर्क-लाइफ बैलेंस, सैलरी और मैनेजमेंट के आधार पर नंबर दिए गए हैं. ब्लाइंड में एक अलग सवाल भी पूछा गया कि “क्या आप यहां काम करना चाहेंगे? यह सवाल उन लोगों से पूछा गया जो इन कंपनियों में काम नहीं करते हैं.
AI को लेकर बढ़ी चिंता
ब्लाइंड की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब एआई की वजह से नौकरियों को लेकर चिंता बढ़ रही है. ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ने साल की शुरुआत में बड़े पैमाने पर छंटनी का ऐलान किया है, जिससे दुनिया भर में 16,000 से ज्यादा नौकरियां प्रभावित होंगी. वहीं, भारत का 300 अरब डॉलर का आईटी सेक्टर भी एआई और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल के कारण दबाव में है. पहले जो कंपनियां अपने काम के लिए इंफोसिस और टीसीएस जैसी आईटी कंपनियों पर निर्भर रहती थीं, अब उन्हें उतनी जरूरत नहीं पड़ सकती.
रिपोर्ट में इन बातों का जिक्र
अध्ययन में पता चला कि किसी कंपनी का नाम और उसकी बड़ी छवि होने का मतलब यह नहीं है कि वहां काम करने वाले कर्मचारी खुश भी हों. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ज्यादा सैलरी देने वाली कंपनियां हमेशा अच्छी रेटिंग नहीं पाती. कुल मिलाकर सबसे ज्यादा सैलरी देने वाली कंपनियों में से एक तिहाई से भी कम कंपनियां टॉप रेटेड कंपनियों में शामिल हैं. ब्लाइंड के रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में भारतीय प्रोफेशनल जिन कंपनियों में सबसे ज्यादा काम करना चाहते हैं, उनमें अमेजन, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एटलासियन, फ्लिपकार्ट, ज़ेटा, इनमोबी, टेकिओन कॉर्प, उबर, वॉलमार्ट, सेल्सफोर्स, एडोब, मेटा, ओरेकल और शेयरचैट शामिल हैं. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि ज्यादा वेतन जरूर लोगों को आकर्षित करता है, लेकिन इससे कर्मचारियों की संतुष्टि हमेशा नहीं बढ़ती.
नीचे 2026 में भारत में सबसे ज्यादा औसत कुल वेतन देने वाली कंपनियों की लिस्ट दी गई है. (1 डॉलर ≈ ₹83 के हिसाब से लगभग रकम बदली गई है)
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